Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 793

1875 Mantra
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मि꣣त्रं꣢ व꣣य꣡ꣳ ह꣢वामहे꣣ व꣡रु꣢ण꣣ꣳ सो꣡म꣢पीतये । या꣢ जा꣣ता꣢ पू꣣त꣡द꣢क्षसा ॥७९३॥

मि꣣त्र꣢म् । मि꣣ । त्र꣢म् । व꣣य꣢म् । ह꣣वामहे । व꣡रु꣢꣯णम् । सो꣡म꣢꣯पीतये । सो꣡म꣢꣯ । पी꣣तये । या꣢ । जा꣡ता꣢ । पू꣣त꣡द꣢क्षसा । पू꣣त꣢ । द꣣क्षसा ॥७९३॥

Mantra without Swara
मित्रं वयꣳ हवामहे वरुणꣳ सोमपीतये । या जाता पूतदक्षसा ॥

मित्रम् । मि । त्रम् । वयम् । हवामहे । वरुणम् । सोमपीतये । सोम । पीतये । या । जाता । पूतदक्षसा । पूत । दक्षसा ॥७९३॥

Samveda - Mantra Number : 793
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(वयम्) हम लोग (सोमपीतये) यश की रक्षा के लिए (मित्रम्) बाहर और अन्दर स्थित जीवन-हेतु प्राण को अथवा ब्रह्म-बल को, (वरुणम्) ऊर्ध्वगति तथा बल के हेतु उदान को अथवा क्षत्र-बल को (हवामहे) पुकारते हैं, ग्रहण करते हैं, (या) जो (पूतदक्षसा) पवित्र बलवाले अथवा बल को पवित्र करनेवाले (जाता) हुए हैं ॥१॥
Essence
सब लोगों को चाहिए कि शरीर में प्राणनक्रिया के हेतु प्राण को और ऊर्ध्वगति के हेतु उदान को तथा राष्ट्र में ब्रह्म-बल और क्षत्र-बल को बढ़ाकर शरीर तथा राष्ट्र के स्वास्थ्य को उन्नत करें ॥१॥
Subject
अगले मन्त्र में प्राण-उदान तथा ब्रह्म-क्षत्र विषयों का वर्णन है।