Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 744

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡नु꣢ प्र꣣त्न꣡स्यौक꣢꣯सो हु꣣वे꣡ तु꣢विप्र꣣तिं꣡ नर꣢꣯म् । यं꣢ ते꣣ पू꣡र्वं꣢ पि꣣ता꣢ हु꣣वे꣢ ॥७४४॥

अ꣣नु꣢꣯ । प्र꣣त्न꣡स्य꣢ । ओ꣡क꣢꣯सः । हु꣣वे꣢ । तु꣣विप्रति꣢म् । तु꣣वि । प्रति꣢म् । न꣡र꣢꣯म् । यम् । ते꣣ । पू꣡र्व꣢꣯म् । पि꣣ता꣢ । हु꣣वे꣢ ॥७४४॥

Mantra without Swara
अनु प्रत्नस्यौकसो हुवे तुविप्रतिं नरम् । यं ते पूर्वं पिता हुवे ॥

अनु । प्रत्नस्य । ओकसः । हुवे । तुविप्रतिम् । तुवि । प्रतिम् । नरम् । यम् । ते । पूर्वम् । पिता । हुवे ॥७४४॥

Samveda - Mantra Number : 744
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 3;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
प्रथम—परमेश्वर के पक्ष में। मैं उपासक (प्रत्नस्य) चिरकाल से बने हुए (ओकसः) ब्रह्माण्डरूप घर के (नरम्) नेता, (तुविप्रतिम्) बहुत से पदार्थों का निर्माण करनेवाले तुझ (इन्द्र) जगदीश्वर को (अनुहुवे) अनुकूल करने के लिए पुकारता हूँ, (यं ते) जिस तुझ जगदीश को (पूर्वम्) पहले (पिता) मेरा पिता (हुवे) पुकारा करता था ॥ द्वितीय—आचार्य के पक्ष में। हे बालक ! मैं तेरा चाचा आदि (तुविप्रतिम्) बहुत सी विद्याओं की प्रतिमूर्ति, (प्रत्नस्य) पुरातन (ओकसः) विद्यागृह के (नरम्) नेता आचार्य को (अनु) अनुकूल करके, तेरे पढ़ाने तथा सदाचार सिखाने के लिए (हुवे) पुकारता हूँ, (यम्) जिस आचार्य को (पूर्वम्) पहले (ते) तेरा (पिता) पिता अन्य बालकों को पढ़ाने के लिए (हुवे) पुकारता रहा है ॥२॥
Essence
सब मनुष्यों को परमेश्वर की उपासना करनी चाहिए और बालकों के संरक्षक पिता, चाचा आदि को चाहिए कि विद्या पढ़ने के लिए बालकों को सुयोग्य गुरु के पास भेजें, जिससे वे विद्वान् होकर कुशल नागरिक बनें ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमेश्वर की स्तुति तथा गुरु-शिष्य का विषय है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.