Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 698

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अन्धीगुः श्यावाश्विः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यो꣡ धार꣢꣯या पाव꣣क꣡या꣢ परिप्र꣣स्य꣡न्द꣢ते सु꣣तः꣢ । इ꣢न्दु꣣र꣢श्वो꣣ न꣡ कृत्व्यः꣢꣯ ॥६९८॥

यः । धा꣡र꣢꣯या । पा꣣वक꣡या꣢ । प꣣रिप्रस्य꣡न्द꣢ते । प꣣रि । प्रस्य꣡न्द꣢ते । सु꣣तः꣢ । इ꣡न्दुः꣢꣯ । अ꣡श्वः꣢꣯ । न । कृ꣡त्व्यः꣢꣯ ॥६९८॥

Mantra without Swara
यो धारया पावकया परिप्रस्यन्दते सुतः । इन्दुरश्वो न कृत्व्यः ॥

यः । धारया । पावकया । परिप्रस्यन्दते । परि । प्रस्यन्दते । सुतः । इन्दुः । अश्वः । न । कृत्व्यः ॥६९८॥

Samveda - Mantra Number : 698
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 5;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(सुतः) उत्पन्न किया गया (यः) जो (पावकया) पवित्र करनेवाली (धारया) धारा के साथ (परिप्रस्यन्दते) चारों ओर बहता है, वह (इन्दुः) ज्ञान, कर्म और उपासना से मिलनेवाला आनन्द (कृत्व्यः) संग्राम में कुशल (अश्वः न) घोड़े के समान (कृत्व्यः) कृतार्थ करनेवाला होता है ॥२॥ इस मन्त्र में श्लिष्टोपमालङ्कार है ॥२॥
Essence
वे लोग धन्य हैं, जो ज्ञान, कर्म और उपासना से प्राप्त होनेवाले अगाध आनन्द का अनुभव करते हैं ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में ज्ञान, कर्म और उपासना से मिलनेवाले आनन्द का वर्णन है।