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Samveda Mantra 627

1875 Mantra
Devata- अग्निः पवमानः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
अ꣢ग्न꣣ आ꣡यू꣢ꣳषि पवस꣣ आ꣢सु꣣वो꣢र्ज꣣मि꣡षं꣢ च नः । आ꣣रे꣡ बा꣢धस्व दु꣣च्छु꣡ना꣢म् ॥६२७॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । आ꣡यूँ꣢꣯षि । प꣣वसे । आ꣢ । सु꣣व । ऊ꣡र्ज꣢꣯म् । इ꣡ष꣢꣯म् । च꣣ । नः । आरे꣢ । बा꣣धस्व । दुच्छु꣡ना꣢म् ॥६२७॥

Mantra without Swara
अग्न आयूꣳषि पवस आसुवोर्जमिषं च नः । आरे बाधस्व दुच्छुनाम् ॥

अग्ने । आयूँषि । पवसे । आ । सुव । ऊर्जम् । इषम् । च । नः । आरे । बाधस्व । दुच्छुनाम् ॥६२७॥

Samveda - Mantra Number : 627
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 5;

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Meaning
हे (अग्ने) अग्रनायक परमात्मन्, विद्वन् अथवा राजन् ! आप (आयूंषि) हमारे जीवनों को (पवसे) पवित्र करो। (नः) हमारे लिए (ऊर्जम्) बल एवं प्राण को (इषं च) और विज्ञान को (आसुव) चारों ओर से प्रेरित करो, लाओ। (दुच्छुनाम्) दुर्गति को (आरे) दूर (बाधस्व) धकेल दो ॥१॥ इस मन्त्र में अर्थश्लेष अलङ्कार है ॥१॥
Essence
मनुष्यों को चाहिए कि परमात्मा की उपासना कर, विद्वान् स्त्री-पुरुषों की और राजा की संगति कर, जीवनों में पवित्रता लाकर, बल, प्राणशक्ति, विज्ञान आदि का संचय कर दुःख, दुर्गति आदि को विनष्ट करें ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा का अग्नि पवमान देवता है। अग्नि नाम से परमात्मा, विद्वान् और राजा से प्रार्थना की गयी है।

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