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Samveda Mantra 593

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अमहीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
ए꣣ना꣡ विश्वा꣢꣯न्य꣣र्य꣢꣫ आ द्यु꣣म्ना꣢नि꣣ मा꣡नु꣢षाणाम् । सि꣡षा꣢सन्तो वनामहे ॥५९३॥

ए꣣ना꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯नि । अ꣣र्यः꣢ । आ । द्यु꣣म्ना꣡नि꣢ । मा꣡नु꣢꣯षाणाम् । सि꣡षा꣢꣯सन्तः । व꣣नामहे ॥५९३॥

Mantra without Swara
एना विश्वान्यर्य आ द्युम्नानि मानुषाणाम् । सिषासन्तो वनामहे ॥

एना । विश्वानि । अर्यः । आ । द्युम्नानि । मानुषाणाम् । सिषासन्तः । वनामहे ॥५९३॥

Samveda - Mantra Number : 593
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 1;

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Meaning
हे पवमान सोम अर्थात् सर्वोत्पादक पवित्रतादायक परमात्मन् ! (अर्यः) सबके स्वामी आप (एना) इन (सर्वाणि) सब (द्युम्नानि) धनों को (आ) प्राप्त कराओ। इन धनों को हम (मानुषाणाम्) सत्पात्र मनुष्यों को (सिषासन्तः) दान करने के अभिलाषी होते हुए (वनामहे) पाना चाहते हैं ॥८॥
Essence
जिस धन से दूसरों का हित नहीं होता, वह धन धन नहीं, किन्तु पुञ्जित अपयश ही है, क्योंकि वेद कहता है कि अकेला खानेवाला पाप का भागी होता है (ऋ० १०।११७।६) ॥८॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मारूप सोम से धन की याचना की गयी है।

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