Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 582

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- ऋणंचयो राजर्षिः Chhand- यवमध्या गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
स꣡ सु꣢न्वे꣣ यो꣡ वसू꣢꣯नां꣣ यो꣢ रा꣣या꣡मा꣢ने꣣ता꣡ य इडा꣢꣯नाम् । सो꣢मो꣣ यः꣡ सु꣢क्षिती꣣ना꣢म् ॥५८२॥

सः꣢ । सु꣣न्वे । यः꣢ । व꣡सू꣢꣯नाम् । यः । रा꣣या꣢म् । आ꣣नेता꣢ । आ꣣ । नेता꣢ । यः । इ꣡डा꣢꣯नाम् । सो꣡मः꣢꣯ । यः । सु꣣क्षितीना꣢म् । सु꣣ । क्षितीना꣢म् ॥५८२॥

Mantra without Swara
स सुन्वे यो वसूनां यो रायामानेता य इडानाम् । सोमो यः सुक्षितीनाम् ॥

सः । सुन्वे । यः । वसूनाम् । यः । रायाम् । आनेता । आ । नेता । यः । इडानाम् । सोमः । यः । सुक्षितीनाम् । सु । क्षितीनाम् ॥५८२॥

Samveda - Mantra Number : 582
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 11;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(सः) वह (सोमः) सर्वोत्पादक रसमय परमेश्वर, (सुन्वे) ध्यान द्वारा हृदय में अभिषुत किया जाता है, (यः) जो (वसूनाम्) किरणों का (यः) जो (रायाम्) धनों का, (यः) जो (इडानाम्) भूमियों, वाणियों, अन्नों और गायों का और (यः) जो (सुक्षितीनाम्) श्रेष्ठ मनुष्यों का (आ नेता) प्राप्त करानेवाला है ॥५॥ इस मन्त्र में ‘यः’ की चार बार पुनरुक्ति यह द्योतित करने के लिए है कि वह परमेश्वर ही इन पदार्थों को प्राप्त करानेवाला है, अन्य कोई नहीं। ‘वसूनाम्, रायाम्’ इन दोनों के धनवाची होने के कारण और ‘इडानाम्’, सुक्षितीनाम्’ इनके भूमिवाची होने के कारण प्रथम दृष्टि में एकार्थता प्रतीत होती है, किन्तु व्याख्यात रूप में अर्थ-भेद है। अतः पुनरुक्तवदाभास अलङ्कार है ॥५॥
Essence
जो परमेश्वर जगत् में दिखायी देनेवाले सभी पदार्थों का उत्पादक और प्राप्त करानेवाला है, उसकी उपासना से सबको आनन्दरस प्राप्त करना चाहिए ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में सोम परमात्मा कैसा है, इसका वर्णन है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.