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Samveda Mantra 581

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कृतयशा आङ्गिरसः Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
ए꣣त꣢मु꣣ त्यं꣡ म꣢द꣣च्यु꣡त꣢ꣳ स꣣ह꣡स्र꣢धारं वृष꣣भं꣡ दिवो꣣दु꣡ह꣢म् । वि꣢श्वा꣣ व꣡सू꣢नि꣣ बि꣡भ्र꣢तम् ॥५८१॥

ए꣣त꣢म् । उ꣣ । त्य꣢म् । म꣣दच्यु꣡त꣢म् । म꣣द । च्यु꣡त꣢꣯म् । स꣣ह꣡स्र꣢धारम् । स꣣ह꣡स्र꣢ । धा꣣रम् । वृषभ꣢म् । दि꣣वोदु꣡ह꣢म् । दि꣣वः । दु꣡ह꣢꣯म् । वि꣡श्वा꣢꣯ । व꣡सू꣢꣯नि । बि꣡भ्र꣢꣯तम् ॥५८१॥

Mantra without Swara
एतमु त्यं मदच्युतꣳ सहस्रधारं वृषभं दिवोदुहम् । विश्वा वसूनि बिभ्रतम् ॥

एतम् । उ । त्यम् । मदच्युतम् । मद । च्युतम् । सहस्रधारम् । सहस्र । धारम् । वृषभम् । दिवोदुहम् । दिवः । दुहम् । विश्वा । वसूनि । बिभ्रतम् ॥५८१॥

Samveda - Mantra Number : 581
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 11;

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1 Bhashyas
Meaning
(एतम् उ) इस, सबके समीपस्थ, (त्यम्) प्रसिद्ध, (मदच्युतम्) आनन्दस्रावी, (सहस्रधारम्) सत्य, अहिंसा, न्याय, दया आदि गुणों की सहस्र धाराएँ बहानेवाले, (वृषभम्) महाबली, (दिवोदुहम्) आकाशरूपी गाय को दुहनेवाले अर्थात् आकाश से सूर्य-किरणों, मेघजलों आदि की वर्षा करनेवाले, (विश्वा) सब (वसूनि) ऐश्वर्यों को (बिभ्रतम्) धारण करनेवाले सोम परमात्मा को (आ सोत) हृदय में प्रकट करो, तथा (परि षिञ्चत) श्रद्धारसों से सींचो ॥४॥
Essence
मनुष्यों को चाहिए कि आनन्द की प्राप्ति के लिए रस के भण्डार और सहस्रों धाराओं से रस बरसानेवाले परमात्मा रूप सोम को अपने हृदय में श्रद्धाभाव से धारण करें ॥४॥
Subject
अगले मन्त्र में बताया गया है कि कैसे परमात्मा को श्रद्धारसों से सींचो।