Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 524

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- बृषगणो वासिष्ठः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣡ काव्य꣢꣯मु꣣श꣡ने꣢व ब्रुवा꣣णो꣢ दे꣣वो꣢ दे꣣वा꣢नां꣣ ज꣡नि꣢मा विवक्ति । म꣡हि꣢व्रतः꣣ शु꣡चि꣢बन्धुः पाव꣣कः꣢ प꣣दा꣡ व꣢रा꣣हो꣢ अ꣣꣬भ्ये꣢꣯ति꣣ रे꣡भ꣢न् ॥५२४॥

प्र꣢ । का꣡व्य꣢꣯म् । उ꣣श꣡ना꣢ । इ꣣व । ब्रुवाणः꣢ । दे꣣वः꣢ । दे꣣वा꣡ना꣢म् । ज꣡नि꣢꣯म । वि꣣वक्ति । म꣡हि꣢꣯व्रतः । म꣡हि꣢꣯ । व्र꣣तः । शु꣡चि꣢꣯बन्धुः । शु꣡चि꣢꣯ । ब꣣न्धुः । पावकः꣢ । प꣣दा꣢ । व꣣राहः꣢ । अ꣣भि꣢ । ए꣣ति । रे꣡भ꣢꣯न् ॥५२४॥

Mantra without Swara
प्र काव्यमुशनेव ब्रुवाणो देवो देवानां जनिमा विवक्ति । महिव्रतः शुचिबन्धुः पावकः पदा वराहो अभ्येति रेभन् ॥

प्र । काव्यम् । उशना । इव । ब्रुवाणः । देवः । देवानाम् । जनिम । विवक्ति । महिव्रतः । महि । व्रतः । शुचिबन्धुः । शुचि । बन्धुः । पावकः । पदा । वराहः । अभि । एति । रेभन् ॥५२४॥

Samveda - Mantra Number : 524
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 6;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(काव्यम्) काव्य का (प्र ब्रुवाणः) प्रवचन करते हुए (उशना इव) धर्मेच्छु विद्वान् के समान (काव्यम्) वेदरूप काव्य का (प्र ब्रुवाणः) उपदेश करता हुआ (देवः) दान आदि गुणों से युक्त सोम परमात्मा (देवानाम्) प्रकाशक अग्नि, सूर्य, विद्युत् आदि पदार्थों के तथा इन्द्रियों के (जनिम) उत्पत्ति-प्रकार को (प्र विवक्ति) वेद द्वारा भली-भाँति बतलाता है। (महिव्रतः) महान् कर्मोंवाला, (शुचिबन्धुः) पवित्रात्मा जनों से बन्धुत्व स्थापित करनेवाला, (पावकः) मनुष्यों को पवित्र करनेवाला वह जगदीश्वर (रेभन्) गर्जते हुए (वराहः) मेघ के समान (रेभन्) उद्बोधन के शब्द बोलता हुआ (पदा) गन्तव्य सत्पात्र जनों के पास (अभ्येति) पहुँचता है ॥२॥ इस मन्त्र में ‘उशनेव’ में वाच्योपमा और ‘वराहः’ में लुप्तोपमा अलङ्कार है। ‘देवो-देवा’ में छेकानुप्रास है ॥२॥
Essence
जैसे सोमरस धारापात शब्द करता हुआ पात्रों में जाता है और जैसे मेघ गर्जना करता हुआ भूमि पर बरसता है, वैसे ही सौम्य परमेश्वर जीभ के बिना भी सत्कर्मों का उपदेश करता हुआ स्तोता जनों के पास पहुँचता है ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में यह वर्णन है कि सोम परमात्मा क्या करता है।