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Samveda Mantra 49

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- सुदीतिपुरुमीढावाङ्गिरसौ तयोर्वान्यतरः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣ग्नि꣡मी꣢डि꣣ष्वा꣡व꣢से꣣ गा꣡था꣢भिः शी꣣र꣡शो꣢चिषम् । अ꣣ग्नि꣢ꣳ रा꣣ये꣡ पु꣢रुमीढ श्रु꣣तं꣢꣫ नरो꣣ऽग्निः꣡ सु꣢दी꣣त꣡ये꣢ छ꣣र्दिः꣢ ॥४९॥

अ꣣ग्नि꣢म् । ई꣣डिष्व । अ꣡व꣢꣯से । गा꣡था꣢꣯भिः । शी꣣र꣡शो꣢चिषम् । शी꣣र꣢ । शो꣣चिषम् । अग्नि꣢म् । रा꣣ये꣢ । पु꣣रुमीढ । पुरु । मीढ । श्रुत꣢म् । न꣡रः꣢꣯ । अ꣣ग्निः꣢ । सु꣣दीत꣡ये꣢ । सु꣣ । दीत꣡ये꣢ । छ꣣र्दिः꣢ ॥४९॥

Mantra without Swara
अग्निमीडिष्वावसे गाथाभिः शीरशोचिषम् । अग्निꣳ राये पुरुमीढ श्रुतं नरोऽग्निः सुदीतये छर्दिः ॥

अग्निम् । ईडिष्व । अवसे । गाथाभिः । शीरशोचिषम् । शीर । शोचिषम् । अग्निम् । राये । पुरुमीढ । पुरु । मीढ । श्रुतम् । नरः । अग्निः । सुदीतये । सु । दीतये । छर्दिः ॥४९॥

Samveda - Mantra Number : 49
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 5;

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1 Bhashyas
Meaning
हे (पुरुमीढ) अनेक गुणों से सिक्त स्तोता ! तू (अवसे) रक्षा, प्रगति, सर्वजनप्रीति और तृप्तिलाभ के लिए (शीरशोचिषम्) सर्वत्र व्यापक ज्योतिवाले (अग्निम्) तेजस्वी परमात्मा की (गाथाभिः) मन्त्रवाणियों से (ईडिष्व) स्तुति और आराधना कर। (श्रुतम्) महिमा वर्णन करनेवाले वेदादि शास्त्रों से सुने हुए (अग्निम्) उस परमात्मा की, तू (राये) भौतिक एवं आध्यात्मिक सब प्रकार के धनों की प्राप्ति के लिए (ईडिष्व) स्तुति और आराधना कर। हे (नरः) पौरुषवान् मनुष्यो ! (अग्निः) जगत् का नायक परमात्मा (सुदीतये) उत्तम कर्मवाले पुरुषार्थी जन के लिए (छर्दिः) शरण होता है ॥५॥
Essence
धन आदि समस्त कल्याणों के अभिलाषी मनुष्यों को चाहिए कि वे पुरुषार्थी होकर सर्वत्र व्याप्त तेजोंवाले परमगुरु परमात्मा का भजन करें ॥५॥
Subject
किसलिए मनुष्यों को परमात्मा की स्तुति करनी चाहिए, यह कहते हैं।