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Samveda Mantra 336

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
यो꣡ नो꣢ वनु꣣ष्य꣡न्न꣢भिदा꣢ति꣣ म꣢र्त꣣ उ꣡ग꣢णा वा꣣ म꣡न्य꣢मानस्तु꣣रो꣡ वा꣢ । क्षि꣣धी꣢ यु꣣धा꣡ शव꣢꣯सा वा꣣ त꣡मि꣢न्द्रा꣣भी꣡ ष्या꣢म वृषमण꣣स्त्वो꣡ताः꣢ ॥३३६

यः꣢ । नः꣣ । वनुष्य꣢न् । अ꣣भिदा꣡ति꣢ । अ꣣भि । दा꣡ति꣢꣯ । म꣡र्तः꣢꣯ । उ꣡ग꣢꣯णा । उ । ग꣣णा । वा । म꣡न्य꣢꣯मानः । तु꣣रः꣢ । वा꣣ । क्षिधी꣢ । यु꣣धा꣢ । श꣡व꣢꣯सा । वा꣣ । त꣢म् । इ꣣न्द्र । अभि꣢ । स्या꣣म । वृषमणः । वृष । मनः । त्वो꣡ताः꣢꣯ । त्वा । ऊ꣣ताः ॥३३६॥

Mantra without Swara
यो नो वनुष्यन्नभिदाति मर्त उगणा वा मन्यमानस्तुरो वा । क्षिधी युधा शवसा वा तमिन्द्राभी ष्याम वृषमणस्त्वोताः ॥३३६

यः । नः । वनुष्यन् । अभिदाति । अभि । दाति । मर्तः । उगणा । उ । गणा । वा । मन्यमानः । तुरः । वा । क्षिधी । युधा । शवसा । वा । तम् । इन्द्र । अभि । स्याम । वृषमणः । वृष । मनः । त्वोताः । त्वा । ऊताः ॥३३६॥

Samveda - Mantra Number : 336
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 11;

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1 Bhashyas
Meaning
(यः मर्तः) जो मनुष्य (वनुष्यन्) क्रोध करता हुआ (उगणा वा) और सैन्यगणों अथवा आयुध गणों को तैयार किये हुए (मन्यमानः) अभिमान करता हुआ, अथवा (उगणा) अपनी शस्त्रास्त्रों से सज्जित सेनाओं को (मन्यमानः) बहुत मानता हुआ (तुरः) शीघ्रकारी यमराज भी होकर (नः) हमारी (अभिदाति) हिंसा पर उतारू होता है, हे (इन्द्र) शत्रुविदारक परमात्मन् वा राजन् ! (तम्) उस मनुष्य को (त्वम्) आप (युधा) युद्ध से (शवसा वा) और बल से (क्षिधि) विनष्ट कर दो। हे (वृषमणः) बलवान् मनवाले परमात्मन् वा राजन् ! (त्वोताः) आप से रक्षित हम, उसे (अभिस्याम) परास्त कर दें ॥५॥
Essence
जो वैरी शत्रु विशाल सेना लेकर अपने बल का अभिमान करता हुआ सज्जनों को उद्विग्न करे, उसे वे परमात्मा से पुरुषार्थ की प्रेरणा लेकर और राजा की सहायता से युद्ध में पराजित कर दें ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में यह विषय है कि परमात्मा और राजा की सहायता से हम क्या करें।