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Samveda Mantra 299

1875 Mantra
Devata- त्वष्टा, पर्जन्यः, ब्रह्मणस्पतिः, अदितिः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
त्व꣡ष्टा꣢ नो꣣ दै꣢व्यं꣣ व꣡चः꣢ प꣣र्ज꣢न्यो꣣ ब्र꣡ह्म꣢ण꣣स्प꣡तिः꣢ । पु꣢त्रै꣡र्भ्रातृ꣢꣯भि꣣र꣡दि꣢ति꣣र्नु꣡ पा꣢तु नो दु꣣ष्ट꣢रं꣣ त्रा꣡म꣢णं꣣ व꣡चः꣢ ॥२९९॥

त्व꣡ष्टा꣢꣯ । नः꣣ । दै꣡व्य꣢꣯म् । व꣡चः꣢꣯ । प꣣र्ज꣡न्यः꣢ । ब्र꣡ह्म꣢꣯णः । प꣡तिः꣢꣯ । पु꣣त्रैः꣢ । पु꣣त् । त्रैः꣢ । भ्रा꣡तृ꣢भिः । अ꣡दि꣢꣯तिः । अ । दि꣣तिः । नु꣢ । पा꣣तु । नः । दुष्ट꣡र꣢म् । दुः꣣ । त꣡र꣢꣯म् । त्रा꣡म꣢꣯णम् । व꣡चः꣢꣯ ॥२९९॥

Mantra without Swara
त्वष्टा नो दैव्यं वचः पर्जन्यो ब्रह्मणस्पतिः । पुत्रैर्भ्रातृभिरदितिर्नु पातु नो दुष्टरं त्रामणं वचः ॥

त्वष्टा । नः । दैव्यम् । वचः । पर्जन्यः । ब्रह्मणः । पतिः । पुत्रैः । पुत् । त्रैः । भ्रातृभिः । अदितिः । अ । दितिः । नु । पातु । नः । दुष्टरम् । दुः । तरम् । त्रामणम् । वचः ॥२९९॥

Samveda - Mantra Number : 299
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 7;

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1 Bhashyas
Meaning
(त्वष्टा) दोषनिवारक, तेजस्वी, दुःखच्छेदक विद्वान् मनुष्य, (पर्जन्यः) बादल के समान उपदेश की वर्षा करनेवाला संन्यासी, और (ब्रह्मणः पतिः) ज्ञान का अधिपति आचार्य (नः) हमारे लिए (दैव्यं वचः) ईश्वरीय वेदवचन का उपदेश करें। (पुत्रैः) पुत्रों सहित, और (भ्रातृभिः) भाई-बन्धुओं सहित (नः) हमें (अदितिः) जगन्माता (नु) शीघ्र ही (पातु) रक्षा प्रदान करती रहे। हमारा (वचः) वचन (दुष्टरम्) दुस्तर, अकाट्य तथा (त्रामणम्) दूसरों की रक्षा करनेवाला होवे ॥७॥
Essence
विद्वानों के उपदेश से पुत्र, पौत्र, बन्धु, बान्धव आदि सहित सब लोग वेद के ज्ञाता, सत्कर्मों में संलग्न और परमेश्वर-प्रेमी होते हुए व्यवहार में सत्य, मधुर, प्रभावजनक तथा कुतर्कों से अकाट्य वचन बोला करें ॥७॥
Subject
इस मन्त्र के देवता मन्त्रोक्त त्वष्टा, पर्जन्य, ब्रह्मणस्पति और अदिति हैं। इन्द्र के प्रकरण में उनसे भी रक्षा आदि की याचना की गयी है।