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Samveda Mantra 251

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣢दु꣣ त्ये꣡ मधु꣢꣯मत्तमा꣣ गि꣢र꣣ स्तो꣢मा꣣स ईरते । स꣣त्राजि꣡तो꣢ धन꣣सा꣡ अक्षि꣢꣯तोतयो वाज꣣य꣢न्तो꣣ र꣡था꣢ इव ॥२५१॥

उ꣢द् । उ꣣ । त्ये꣢ । म꣡धु꣢꣯मत्तमाः । गि꣡रः꣢꣯ । स्तो꣡मा꣢꣯सः । ई꣣रते । सत्राजि꣡तः꣢ । स꣣त्रा । जि꣡तः꣢꣯ । ध꣣नसाः꣢ । ध꣣न । साः꣢ । अ꣡क्षि꣢꣯तोतयः । अ꣡क्षि꣢꣯त । ऊ꣣तयः । वाजय꣡न्तः꣢ । र꣡थाः꣢꣯ । इ꣣व ॥२५१॥

Mantra without Swara
उदु त्ये मधुमत्तमा गिर स्तोमास ईरते । सत्राजितो धनसा अक्षितोतयो वाजयन्तो रथा इव ॥

उद् । उ । त्ये । मधुमत्तमाः । गिरः । स्तोमासः । ईरते । सत्राजितः । सत्रा । जितः । धनसाः । धन । साः । अक्षितोतयः । अक्षित । ऊतयः । वाजयन्तः । रथाः । इव ॥२५१॥

Samveda - Mantra Number : 251
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

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1 Bhashyas
Meaning
(त्ये) वे (मधुमत्तमाः) अत्यन्त मधुर, (सत्राजितः) सत्यजयी, (धनसाः) स्तोता को सद्गुणरूप धन प्रदान करनेवाले, (अक्षितोतयः) अक्षय रक्षावाले, (वाजयन्तः) स्तोता को आत्मबल प्रदान करनेवाले, (गिरः) परमेश्वर की अर्चना में साधनभूत (स्तोमासः) मेरे स्तोत्र (रथाः इव) अन्तरिक्ष में चलनेवाले विमान-रूप रथों के समान (उद्-ईरते उ) उठ रहे हैं। जो विमान-रूप रथ भी (सत्राजितः) समवेत शत्रुओं को जीतने में साधनभूत, (धनसाः) स्थानान्तर से धन को लाने में साधनभूत, (अक्षितोतयः) अक्षय रक्षा के साधनभूत, (वाजयन्तः) अन्न आदि को देशान्तर में पहुंचानेवाले तथा (मधुमत्तमाः) अतिशय मधुर गतिवाले होते हैं ॥९॥ इस मन्त्र में श्लिष्टोपमालङ्कार है ॥९॥
Essence
जगदीश्वर की महिमा गाने के लिए मेरी जिह्वा मधुर-मधुर स्तोत्रों को उठा रही है, जैसे विमान-चालक मधुर गतिवाले विमान यानों को ऊपर उठाता है ॥९॥
Subject
अगले मन्त्र में यह वर्णन है कि मेरे कैसे स्तोत्र किस प्रकार परमात्मा के प्रति उठ रहे हैं।