Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 238

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
त꣣र꣢णि꣣रि꣡त्सि꣢षासति꣣ वा꣢जं꣣ पु꣡र꣢न्ध्या यु꣣जा꣢ । आ꣢ व꣣ इ꣡न्द्रं꣢ पुरुहू꣣तं꣡ न꣢मे गि꣣रा꣢ ने꣣मिं꣡ तष्टे꣢꣯व सु꣣द्रु꣡व꣢म् ॥२३८॥

त꣣र꣡णिः꣢ । इत् । सि꣣षासति । वा꣡जम् । पु꣡र꣢꣯न्ध्या । पु꣡र꣢꣯म् । ध्या꣣ । युजा꣢ । आ । वः꣣ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । पु꣣रुहूत꣢म् । पु꣣रु । हूत꣢म् । न꣣मे । गिरा꣢ । ने꣣मि꣢म् । त꣡ष्टा꣢꣯ । इ꣣व । सुद्रु꣡व꣢म् । सु꣣ । द्रु꣡व꣢꣯म् ॥२३८॥

Mantra without Swara
तरणिरित्सिषासति वाजं पुरन्ध्या युजा । आ व इन्द्रं पुरुहूतं नमे गिरा नेमिं तष्टेव सुद्रुवम् ॥

तरणिः । इत् । सिषासति । वाजम् । पुरन्ध्या । पुरम् । ध्या । युजा । आ । वः । इन्द्रम् । पुरुहूतम् । पुरु । हूतम् । नमे । गिरा । नेमिम् । तष्टा । इव । सुद्रुवम् । सु । द्रुवम् ॥२३८॥

Samveda - Mantra Number : 238
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(तरणिः) दुःखों से तरानेवाला इन्द्र परमेश्वर अथवा इन्द्र राजा (इत्) अवश्य (युजा) सदा साथ रहनेवाली (पुरन्ध्या) अपनी बुद्धि और क्रिया से (वाजम्) बल, धन और विज्ञान (सिषासति) बाँटता या देता है। इसलिए मैं (पुरुहूतम्) बहुतों द्वारा स्तुत (इन्द्रम्) उस परमेश्वर वा राजा को (गिरा) वाणी के द्वारा (वः) आप लोगों के लिए (आनमे) कार्य में प्रवृत्त करता हूँ, (तष्टा इव) जैसे शिल्पी (नेमिम्) रथ-चक्र की परिधि को (सुद्रुवम्) सुप्रवृत्त करता है ॥६॥ इस मन्त्र में श्लेष तथा उपमालङ्कार है ॥६॥
Essence
उत्तम प्रज्ञावाला तथा उत्तम कर्मोंवाला परमेश्वर और राजा यथायोग्य मनुष्यों को सुख, धन विद्यादि प्रदान करता है, अतः प्रार्थना-वचनों से सबको उन्हें अपनी ओर प्रवृत्त करना चाहिए। जैसे रथ-चक्र के प्रवृत्त होने से ही रथ में बैठे लोग गन्तव्य स्थान को पहुँच सकते हैं, वैसे ही परमेश्वर और राजा की प्रजा की ओर प्रवृत्ति होने से ही लोगों का अभ्युदय हो सकता है ॥६॥
Subject
अगले मन्त्र में परमेश्वर और राजा की अनुकूलता प्राप्त करने का विषय है।