Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 237

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- कलिः प्रागाथः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
त꣡रो꣣भिर्वो वि꣣द꣡द्व꣢सु꣣मि꣡न्द्र꣢ꣳ स꣣बा꣡ध꣢ ऊ꣣त꣡ये꣢ । बृ꣣ह꣡द्गाय꣢꣯न्तः सु꣣त꣡सो꣢मे अध्व꣣रे꣢ हु꣣वे꣢꣫ भरं꣣ न꣢ का꣣रि꣡ण꣢म् ॥२३७॥

त꣡रो꣢꣯भिः । वः꣣ । विद꣡द्व꣢सुम् । वि꣣द꣢त् । व꣣सुम् । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । स꣣बा꣡धः꣢ । स꣣ । बा꣡धः꣢꣯ । ऊ꣣त꣡ये꣢ । बृ꣣ह꣢त् । गा꣡य꣢꣯न्तः । सु꣣त꣡सो꣢मे । सु꣣त꣢ । सो꣣मे । अध्वरे꣢ । हु꣣वे꣢ । भ꣡र꣢म् । न । का꣣रि꣡ण꣢म् ॥२३७॥

Mantra without Swara
तरोभिर्वो विदद्वसुमिन्द्रꣳ सबाध ऊतये । बृहद्गायन्तः सुतसोमे अध्वरे हुवे भरं न कारिणम् ॥

तरोभिः । वः । विदद्वसुम् । विदत् । वसुम् । इन्द्रम् । सबाधः । स । बाधः । ऊतये । बृहत् । गायन्तः । सुतसोमे । सुत । सोमे । अध्वरे । हुवे । भरम् । न । कारिणम् ॥२३७॥

Samveda - Mantra Number : 237
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे साथियो ! (वः) तुम लोग (सबाधः) जब बाधाओं से आक्रान्त होओ तब (ऊतये) रक्षा के लिए (सुतसोमे) जिसमें श्रद्धा और कर्मरूप सोम का निष्पादन किया गया है, ऐसे (अध्वरे) हिंसारहित जीवन-यज्ञ में (तरोभिः) वेगों और बलों के साथ (विदद्वसुम्) ऐश्वर्य प्राप्त करानेवाले (इन्द्रम्) परमेश्वर के (बृहत्) बहुत अधिक (गायन्तः) गीत गाओ। मैं भी (भरम् न) कुटुम्ब का भरण-पोषण करनेवाले गृहपति के समान (कारिणम्) कर्मशील उस परमेश्वर का (हुवे) आह्वान करता हूँ ॥५॥ इस मन्त्र में उपमालङ्कार है ॥५॥
Essence
जब-जब मनुष्य अपने जीवन में विघ्न-बाधाओं से पीड़ित होते हैं, तब-तब उन्हें परमेश्वर का स्मरण करना चाहिए। स्मरण करने पर वह उन्हें पुरुषार्थ में और कर्मयोग में प्रवृत्त करता है। जैसे कोई गृहपति कर्मपरायण होकर ही कुटुम्ब के भरण-पोषण में समर्थ होता है, वैसे ही परमेश्वर भी कर्मपरायण होकर ही विश्व को धारण करता है और सब उपासकों को भी कर्मयोग में प्रेरित करता है ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः परमेश्वर को स्मरण-योग्य कहा गया है।