Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 235

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣भि꣡ प्र वः꣢꣯ सु꣣रा꣡ध꣢स꣣मि꣡न्द्र꣢मर्च꣣ य꣡था꣢ वि꣣दे꣢ । यो꣡ ज꣢रि꣣तृ꣡भ्यो꣢ म꣣घ꣡वा꣢ पुरू꣣व꣡सुः꣢ स꣣ह꣡स्रे꣢णेव꣣ शि꣡क्ष꣢ति ॥२३५॥

अ꣣भि꣢ । प्र । वः꣣ । सुरा꣡ध꣢सम् । सु꣣ । रा꣡ध꣢꣯सम् । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । अ꣣र्च । य꣡था꣢꣯ । वि꣣दे꣢ । यः । ज꣣रितृ꣡भ्यः꣢ । म꣣घ꣡वा꣢ । पु꣣रूव꣡सुः꣢ । पु꣣रू । व꣡सुः꣢꣯ । स꣣ह꣡स्रे꣢ण । इ꣣व । शि꣡क्ष꣢꣯ति ॥२३५॥

Mantra without Swara
अभि प्र वः सुराधसमिन्द्रमर्च यथा विदे । यो जरितृभ्यो मघवा पुरूवसुः सहस्रेणेव शिक्षति ॥

अभि । प्र । वः । सुराधसम् । सु । राधसम् । इन्द्रम् । अर्च । यथा । विदे । यः । जरितृभ्यः । मघवा । पुरूवसुः । पुरू । वसुः । सहस्रेण । इव । शिक्षति ॥२३५॥

Samveda - Mantra Number : 235
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे साथियो ! (वः) तुम (सुराधसम्) प्रशस्त धनोंवाले और शुभ सफलता को देनेवाले (इन्द्रम्) परमेश्वर को (अभि) लक्ष्य करके (प्र अर्च) भली-भाँति ऐसी अर्चना करो (यथा) जिससे कि वह अर्चना (विदे) जान ली जाए, (यः) जो प्रसिद्ध (मघवा) ऐश्वर्यवान् (पुरूवसुः) बहुत अधिक बसानेवाला अथवा बहुतों को बसानेवाला परमेश्वर (जरितृभ्यः) स्तोताओं के लिए (सहस्रेण इव) मानो हजार हाथों से (शिक्षति) भौतिक और आध्यात्मिक सम्पत्ति प्रदान करता है ॥३॥ इस मन्त्र में ‘सहस्रेणेव शिक्षति’ में उत्प्रेक्षालङ्कार है ॥३॥
Essence
सब मनुष्यों को चाहिए कि बहुत सम्पत्ति के स्वामी, पुरुषार्थीयों को सफलता देनेवाले, निवासक, भूरि-भूरि सुख-सम्पदा को बरसानेवाले परमेश्वर की श्रद्धा के साथ पूजा करें ॥१॥
Subject
अगले मन्त्र में मनुष्यों को परमेश्वर की अर्चना के लिए प्रेरित किया गया है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.