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Samveda Mantra 23

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡ग्ने꣢ मृ꣣ड꣢ म꣣हा꣢ꣳ अ꣣स्य꣢य꣣ आ꣡ दे꣢व꣣युं꣡ जन꣢꣯म् । इ꣣ये꣡थ꣢ ब꣣र्हि꣢रा꣣स꣡द꣢म् ॥२३॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । मृ꣣ड꣢ । म꣣हा꣢न् । अ꣣सि । अ꣡यः꣢꣯ । आ । दे꣣वयु꣢म् । ज꣡न꣢꣯म् । इ꣣ये꣡थ꣢ । ब꣣र्हिः꣢ । आ꣣स꣡द꣢म् । आ꣣ । स꣡द꣢म् ॥२३॥

Mantra without Swara
अग्ने मृड महाꣳ अस्यय आ देवयुं जनम् । इयेथ बर्हिरासदम् ॥

अग्ने । मृड । महान् । असि । अयः । आ । देवयुम् । जनम् । इयेथ । बर्हिः । आसदम् । आ । सदम् ॥२३॥

Samveda - Mantra Number : 23
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! आप मुझे (मृड) सुखी कीजिए। आप (महान्) महान् (असि) हो। आप (देवयुम्) दिव्यगुणों की कामना करनेवाले अथवा परमात्माभिलाषी (जनम्) मुझ जन को (अयः) प्राप्त हुए हो। मेरे (बर्हिः) हृदयरूप आसन पर (आसदम्) बैठने के लिए (आ इयेथ) आये हो ॥३॥
Essence
हे परमेश्वर, हे अन्तर्यामिन् ! आप बड़ी कृपा करके मुझ अपने भक्त के हृदयासन पर आसीन होने के लिए आये हैं। निरन्तर दिव्यगुणों का सान्निध्य चाहता हुआ मैं आपके अनुग्रह की याचना करता हूँ। आप महान् हैं, मेरे विषय में भी अपनी महत्ता को चरितार्थ करें। सदा मुझे आनन्दित करते रहें ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा से सुख की प्रार्थना करते हैं।