Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 186

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वत्सः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
ग꣣व्यो꣢꣫ षु णो꣣ य꣡था꣢ पु꣣रा꣢श्व꣣यो꣡त र꣢꣯थ꣣या꣢ । व꣣रिवस्या꣢ म꣣हो꣡ना꣢म् ॥१८६॥

ग꣣व्य꣢ । उ꣣ । सु꣢ । नः꣣ । य꣡था꣢꣯ । पु꣣रा꣢ । अ꣣श्वया꣢ । उ꣣त꣢ । र꣣थया꣢ । व꣣रिवस्या꣢ । म꣣हो꣡ना꣢म् ॥१८६॥

Mantra without Swara
गव्यो षु णो यथा पुराश्वयोत रथया । वरिवस्या महोनाम् ॥

गव्य । उ । सु । नः । यथा । पुरा । अश्वया । उत । रथया । वरिवस्या । महोनाम् ॥१८६॥

Samveda - Mantra Number : 186
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 8;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे इन्द्र ! परमैश्वर्यशाली परब्रह्म परमात्मन् और राजन् ! आप (गव्या) गायों, भूमियों, वाक्शक्तियों, विद्युद्विद्याओं और अध्यात्मप्रकाश की किरणों को प्रदान करने की इच्छा से (उ सु) और (अश्वया) घोड़ों, प्राण-बलों, अग्नि तथा सूर्य की विद्याओं को प्रदान करने की इच्छा से, (उत) और (रथया) भूमि, जल व अन्तरिक्ष में चलनेवाले यानों एवं मानव-देह-रूप रथों को प्रदान करने की इच्छा से, तथा (महोनाम्) हम महानों को (वरिवस्या) धन प्रदान करने की इच्छा से (यथा पुरा) पहले के समान अब भी (नः) हमारे पास आइये ॥२॥ इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है ॥२॥
Essence
परमेश्वर की कृपा से, राजा की सुव्यवस्था से और अपने पुरुषार्थ से मनुष्यों को दुधारू गौएँ, बलवान् घोड़े, तेल-गैस-बिजली-सूर्यताप आदि से चलाये जानेवाले भूमि, जल और अन्तरिक्ष में चलनेवाले यान, वाणी का बल, प्राण-बल, अग्नि-वायु-बिजली एवं सूर्य की विद्याएँ, अध्यात्म-प्रकाश और चक्रवर्ती राज्य प्राप्त करने चाहिएँ ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में इन्द्र नाम से परमात्मा और राजा से प्रार्थना की गयी है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.