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Samveda Mantra 1810

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- द्विपदा गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢स्व सोम म꣣न्द꣢य꣣न्नि꣡न्द्रा꣢य꣣ म꣡धु꣢मत्तमः ॥१८१०॥

प꣡व꣢꣯स्व । सो꣣म । मन्द꣡य꣢न् । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । म꣡धु꣢꣯मत्तमः ॥१८१०॥

Mantra without Swara
पवस्व सोम मन्दयन्निन्द्राय मधुमत्तमः ॥

पवस्व । सोम । मन्दयन् । इन्द्राय । मधुमत्तमः ॥१८१०॥

Samveda - Mantra Number : 1810
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 9; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 20; Khand » 4;

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सोम) ब्रह्मानन्द-रस ! (मधुमत्तमः) अतिशय मधुर तू (इन्द्राय) जीवात्मा को (मन्दयन्) मोद प्रदान करता हुआ (पवस्व) प्रवाहित हो ॥१॥
Essence
ब्रह्मानन्द का माधुर्य वही जानता है, जो उसका अनुभव करता है ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में ब्रह्मानन्द-रस का विषय कहते हैं।