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Samveda Mantra 1756

1875 Mantra
Devata- उषाः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
उ꣡द꣢पप्तन्नरु꣣णा꣢ भा꣣न꣢वो꣣ वृ꣡था꣢ स्वा꣣यु꣡जो꣢ अ꣡रु꣢षी꣣र्गा꣡ अ꣢युक्षत । अ꣡क्र꣢न्नु꣣षा꣡सो꣢ व꣣यु꣡ना꣢नि पू꣣र्व꣢था꣣ रु꣡श꣢न्तं भा꣣नु꣡मरु꣢꣯षीरशिश्रयुः ॥१७५६॥

उ꣢त् । अ꣣पप्तन् । अरुणाः꣢ । भा꣣न꣡वः꣢ । वृ꣡था꣢꣯ । स्वा꣣यु꣡जः꣢ । सु꣣ । आयु꣡जः꣢ । अ꣡रु꣢꣯षीः । गाः । अयु꣣क्षत । अ꣡क्र꣢꣯न् । उ꣣षा꣡सः꣢ । व꣣यु꣡ना꣢नि । पू꣣र्व꣡था꣢ । रु꣡श꣢꣯न्तम् । भा꣣नु꣢म् । अ꣡रु꣢꣯षीः । अ꣣शिश्रयुः ॥१७५६॥

Mantra without Swara
उदपप्तन्नरुणा भानवो वृथा स्वायुजो अरुषीर्गा अयुक्षत । अक्रन्नुषासो वयुनानि पूर्वथा रुशन्तं भानुमरुषीरशिश्रयुः ॥

उत् । अपप्तन् । अरुणाः । भानवः । वृथा । स्वायुजः । सु । आयुजः । अरुषीः । गाः । अयुक्षत । अक्रन् । उषासः । वयुनानि । पूर्वथा । रुशन्तम् । भानुम् । अरुषीः । अशिश्रयुः ॥१७५६॥

Samveda - Mantra Number : 1756
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 19; Khand » 5;

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Meaning
(अरुणाः) लालिमावाले (भानवः) प्रकाश (वृथा) अनायास (उदपप्तन्) उठ रहे हैं। (अरुषीः) चमकीली उषाओं ने (स्वायुजः) सुख से जुड़नेवाली (गाः) किरणों को (अयुक्षत) पूर्व दिशा के आकाश में जोड़ दिया है। (उषासः) उषाएँ (पूर्वथा) पूर्व दिनों की भाँति (वयुनानि) लोक-जागरण के कर्मों को (अक्रन्) कर रही हैं। (अरुषीः) लालिमावाली ये उषाएँ (रुशन्तम्) चमकीले (भानुम्) सूर्य का (अशिश्रयुः) आश्रय लिये हुए हैं ॥२॥ यहाँ स्वभावोक्ति अलङ्कार है। ‘पूर्वथा’ में उपमा है ॥२॥
Essence
जैसे उषाओं के उदय होने पर आकाश और भूतल प्रकाशित हो जाता है, तथा मनुष्य जागृति अनुभव करते हैं, वैसे ही आध्यात्मिक ज्योतिष्मती प्रज्ञाओं के आविभार्व होने पर चित्तपटल निर्मल हो जाता है और आत्मा, बुद्धि, प्राण, इन्द्रियाँ आदि सब योगसिद्धि के लिए सचेष्ट हो जाते हैं ॥२॥
Subject
आगे फिर उषा का वर्णन है।

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