Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1693

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- विश्वामित्रः प्रागाथः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा꣢ग्नी रोच꣣ना꣢ दि꣣वः꣢꣫ परि꣣ वा꣡जे꣢षु भूषथः । त꣡द्वां꣢ चेति꣣ प्र꣢ वी꣣꣬र्य꣢꣯म् ॥१६९३॥

इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣣ग्नीइ꣡ति꣢ । रो꣣चना꣢ । दि꣡वः꣢ । प꣡रि꣢꣯ । वा꣡जे꣢꣯षु । भू꣣षथः । त꣢त् । वा꣣म् । चेति । प्र꣢ । वी꣣र्यम्꣢ ॥१६९३॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नी रोचना दिवः परि वाजेषु भूषथः । तद्वां चेति प्र वीर्यम् ॥

इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । रोचना । दिवः । परि । वाजेषु । भूषथः । तत् । वाम् । चेति । प्र । वीर्यम् ॥१६९३॥

Samveda - Mantra Number : 1693
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 3;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्राग्नी) आत्मा और मन ! (युवाम्) तुम दोनों (वाजेषु) देवासुरसङ्ग्रामों में (दिवः) प्रकाशक परमात्मा की (रोचना)ज्योति को (परि भूषथः) चारों ओर से प्राप्त करते हो। (तत्) वह प्रसिद्ध (वाम्) तुम दोनों का (वीर्यम्) बल (प्र चेति) सब के द्वारा प्रकृष्टरूप से जाना जाता है ॥१॥
Essence
मनुष्य के आत्मा और मन को योग्य है कि आन्तरिक देवासुरसङ्ग्रामों में सब आसुरी भावों को पराजित करके परमात्मा की प्राप्ति के लक्ष्य तक पहुँचें ॥१॥
Subject
प्रथम मन्त्र में आत्मा और मन का विषय कहा जा रहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.