Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 158

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्षः सुकक्षो वा आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा꣢य꣣ म꣡द्व꣢ने सु꣣तं꣡ परि꣢꣯ ष्टोभन्तु नो꣣ गि꣡रः꣢ । अ꣣र्क꣡म꣢र्चन्तु का꣣र꣡वः꣢ ॥१५८॥

इ꣡न्द्रा꣢꣯य । म꣡द्व꣢꣯ने । सु꣣त꣢म् । प꣡रि꣢꣯ । स्तो꣡भन्तु । नः । गि꣡रः꣢꣯ । अ꣣र्क꣢म् । अ꣣र्चन्तु । कार꣡वः꣢ ॥१५८॥

Mantra without Swara
इन्द्राय मद्वने सुतं परि ष्टोभन्तु नो गिरः । अर्कमर्चन्तु कारवः ॥

इन्द्राय । मद्वने । सुतम् । परि । स्तोभन्तु । नः । गिरः । अर्कम् । अर्चन्तु । कारवः ॥१५८॥

Samveda - Mantra Number : 158
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(मद्वने) आनन्दमय (इन्द्राय) परमैश्वर्यवान् परमात्मा के लिए (सुतम्) अभिषुत भक्तिरूप सोमरस को (नः) हमारी (गिरः) वाणियाँ (परिष्टोभन्तु) तरंगित करें। (अर्कम्) उस अर्चनीय देव की (कारवः) अन्य स्तोता जन भी (अर्चन्तु) मिलकर अर्चना करें ॥४॥
Essence
आनन्द प्राप्त करने की कामनावाला मैं प्रेमरस से परिप्लुत हृदयवाला होकर परमानन्दमय परमात्मा के लिए जिन भक्तिरसों को प्रवाहित कर रहा हूँ, उनमें मेरी स्तुति-वाणियाँ मानो तरंगें उत्पन्न कर रही हैं। अन्य स्तोता जन भी उसी प्रकार परमात्मा की अर्चना करें, जिससे सारा ही वातावरण भक्तिमय और संगीत से तरंगित हो जाए ॥४॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः परमात्मा की अर्चना का विषय है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.