Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1573

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेध्यातिथिः काण्वः Chhand- बार्हतः प्रगाथः (विषमा बृहती, समा सतोबृहती) Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
अ꣣भि꣡ त्वा꣢ पू꣣र्व꣡पी꣢तय꣣ इ꣢न्द्र꣣ स्तो꣡मे꣢भिरा꣣य꣡वः꣢ । स꣣मीचीना꣡स꣢ ऋ꣣भ꣢वः꣣ स꣡म꣢स्वरन्रु꣣द्रा꣡ गृ꣢णन्त पू꣣र्व्य꣢म् ॥१५७३॥

अ꣡भि꣢ । त्वा꣣ । पूर्व꣡पी꣢तये । पू꣣र्व꣢ । पी꣣तये । इ꣡न्द्र꣢꣯ । स्तो꣡मे꣢꣯भिः । आ꣣य꣡वः꣢ । स꣣मीचीना꣡सः꣢ । स꣣म् । ईचीना꣡सः꣢ । ऋ꣣भ꣡वः꣢ । ऋ꣣ । भ꣡वः꣢꣯ । सम् । अ꣣स्वरन् । रुद्राः꣢ । गृ꣣णन्त । पूर्व्य꣢म् ॥१५७३॥

Mantra without Swara
अभि त्वा पूर्वपीतय इन्द्र स्तोमेभिरायवः । समीचीनास ऋभवः समस्वरन्रुद्रा गृणन्त पूर्व्यम् ॥

अभि । त्वा । पूर्वपीतये । पूर्व । पीतये । इन्द्र । स्तोमेभिः । आयवः । समीचीनासः । सम् । ईचीनासः । ऋभवः । ऋ । भवः । सम् । अस्वरन् । रुद्राः । गृणन्त । पूर्व्यम् ॥१५७३॥

Samveda - Mantra Number : 1573
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 16; Khand » 1;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) विद्या के ऐश्वर्य से युक्त आचार्य ! (पूर्वपीतये) श्रेष्ठ विद्यारस के पान के लिए (आयवः) विद्यार्थी जन (स्तोमेभिः) स्तोत्रों द्वारा (त्वा) आपसे (अभि) अभ्यर्थना कर रहे हैं। आपके ही निर्देशन में (ऋभवः) मेधावी छात्र (समीचीनासः) आपस में मिलकर (समस्वरन्) वेदमन्त्रों का उच्चारण करते हैं और (रुद्राः) प्राणवान् ब्रह्मचारीगण (पूर्व्यम्) पूर्व कवियों वा ऋषियों से रचे हुए स्तोत्र आदि काव्य का भी (गृणन्त) गान करते हैं ॥१॥
Essence
सुयोग्य ब्रह्मवेत्ता गुरुओं से सुयोग्य शिष्यों द्वारा पढ़ी हुई भौतिक विद्या और ब्रह्मविद्या फलदायक होती है ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा पूर्वार्चिक में २५६ क्रमाङ्क पर परमात्मा की स्तुति के विषय में व्याख्यात हो चुकी है। यहाँ गुरु-शिष्य के विषय को कहते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.