Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1531

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- केतुराग्नेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡ग्ने꣢ के꣣तु꣢र्वि꣣शा꣡म꣢सि꣣ प्रे꣢ष्ठः꣣ श्रे꣡ष्ठ꣢ उपस्थ꣣स꣢त् । बो꣡धा꣢ स्तो꣣त्रे꣢꣫ वयो꣣ द꣡ध꣢त् ॥१५३१॥

अ꣡ग्ने꣢꣯ । के꣣तुः꣢ । वि꣣शा꣢म् । अ꣣सि । प्रे꣡ष्ठः꣢꣯ । श्रे꣡ष्ठः꣢꣯ । उ꣣पस्थस꣢त् । उ꣣पस्थ । स꣢त् । बो꣡ध꣢꣯ । स्तो꣣त्रे꣢ । व꣡यः꣢꣯ । द꣡ध꣢꣯त् ॥१५३१॥

Mantra without Swara
अग्ने केतुर्विशामसि प्रेष्ठः श्रेष्ठ उपस्थसत् । बोधा स्तोत्रे वयो दधत् ॥

अग्ने । केतुः । विशाम् । असि । प्रेष्ठः । श्रेष्ठः । उपस्थसत् । उपस्थ । सत् । बोध । स्तोत्रे । वयः । दधत् ॥१५३१॥

Samveda - Mantra Number : 1531
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 4;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) अग्रनायक जगदीश्वर वा राजन् ! आप (विशाम्) प्रजाओं के (केतुः) ज्ञानप्रदाता, (प्रेष्ठः) अत्यधिक प्यारे, (श्रेष्ठः) श्रेष्ठ और (उपस्थसत्) समीप विद्यमान (असि) हो। आप ( स्तोत्रे) स्तुतिकर्त्ता वा राष्ट्रभक्त के लिए (वयः) धन, अन्न, आयु आदि (दधत्) प्रदान करते हुए, उसे (बोध) बोध प्रदान करो, सदा कर्त्तव्य के प्रति जागरूक करो ॥५॥
Essence
जैसे जगदीश्वर सबका ज्ञानदाता, प्रियतम, प्रशस्यतम, सुखसम्पत्तिप्रदाता, आयु देनेवाला और जगानेवाला है, वैसे ही राष्ट्र में राजा को होना चाहिए ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में फिर परमात्मा और राजा को संबोधन करते है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.