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Samveda Mantra 1499

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ नो꣢ भज पर꣣मे꣡ष्वा वाजे꣢꣯षु मध्य꣣मे꣡षु꣢ । शि꣢क्षा꣣ व꣢स्वो꣣ अ꣡न्त꣢मस्य ॥१४९९॥

आ꣢ । नः꣣ । भज । परमे꣡षु꣢ । आ । वाजे꣡षु꣢꣯ । म꣣ध्यमे꣡षु꣢ । शि꣡क्ष꣢꣯ । व꣡स्वः꣢꣯ । अ꣡न्त꣢꣯मस्य ॥१४९९॥

Mantra without Swara
आ नो भज परमेष्वा वाजेषु मध्यमेषु । शिक्षा वस्वो अन्तमस्य ॥

आ । नः । भज । परमेषु । आ । वाजेषु । मध्यमेषु । शिक्ष । वस्वः । अन्तमस्य ॥१४९९॥

Samveda - Mantra Number : 1499
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 7; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 14; Khand » 1;

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1 Bhashyas
Meaning
हे अग्ने ! हे विद्वन् परमात्मन् वा आचार्य ! आप (परमेषु) परा-विद्या से उत्पन्न होनेवाले उच्च (वाजेषु) विज्ञानों में (नः आ भज) हमें भागी बनाओ, (मध्यमेषु) अपरा विद्या से उत्पन्न होनेवाले मध्यम (वाजेषु) विज्ञानों में (आ भज) भागी बनाओ और (अन्तमस्य) आपके समीप विद्यमान (वस्वः) सकल ऐश्वर्य का भी (शिक्ष) दान करो ॥३॥
Essence
परमेश्वर की कृपा से तथा योग्य गुरुओं की शिक्षा से सब लोग ‘परा विद्या वह है, जिससे उस अविनश्वर परब्रह्म की प्राप्ति होती है (मु० २।५)’ इस लक्षणवाली परा विद्या को, ‘अपरा विद्या है ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त छन्द, ज्योतिष (मु० २।५)’ इस लक्षणवाली अपरा विद्या को और सकल चाँदी, सोना, मणि, मोती आदि धन को प्राप्त करें ॥३॥
Subject
आगे जगदीश्वर और आचार्य से प्रार्थना करते हैं।