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Samveda Mantra 1478

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रो गाथिनः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वा꣣जी꣡ वाजे꣢꣯षु धीयतेऽध्व꣣रे꣢षु꣣ प्र꣡ णी꣢यते । वि꣡प्रो꣢ य꣣ज्ञ꣢स्य꣣ सा꣡ध꣢नः ॥१४७८॥

वा꣣जी꣢ । वा꣡जे꣢꣯षु । धी꣣यते । अध्वरे꣡षु꣢ । प्र । नी꣣यते । वि꣡प्रः꣢꣯ । वि । प्रः꣣ । यज्ञ꣡स्य꣢ । सा꣡ध꣢꣯नः ॥१४७८॥

Mantra without Swara
वाजी वाजेषु धीयतेऽध्वरेषु प्र णीयते । विप्रो यज्ञस्य साधनः ॥

वाजी । वाजेषु । धीयते । अध्वरेषु । प्र । नीयते । विप्रः । वि । प्रः । यज्ञस्य । साधनः ॥१४७८॥

Samveda - Mantra Number : 1478
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 5;

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1 Bhashyas
Meaning
(वाजी) बलवान् अग्नि नामक परमेश्वर (वाजेषु) देवासुरसंग्रामों में (धीयते) अन्तरात्मा में धारण किया जाता है और (अध्वरेषु) हिंसारहित व्यवहारों में (प्रणीयते) आगे लाया जाता है। वह (विप्रः) विशेष पूर्णता प्रदान करनेवाला तथा (यज्ञस्य साधनः) जीवन-यज्ञ को सफल करनेवाला है ॥२॥
Essence
जो परमेश्वर सबको सिद्धि देनेवाला है, उसकी सब लोगों को मनोयोगपूर्वक आराधना करनी चाहिए ॥२॥
Subject
आगे फिर वही विषय है।