Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1448

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्रा꣢य सोम꣣ पा꣡त꣢वे꣣ म꣡दा꣢य꣣ प꣡रि꣢ षिच्यसे । म꣣नश्चि꣡न्मन꣢꣯स꣣स्प꣡तिः꣢ ॥१४४८॥

इ꣡न्द्रा꣢꣯य । सो꣡म । पा꣡त꣢꣯वे । म꣡दा꣢꣯य । प꣡रि꣢꣯ । सि꣣च्यसे । मनश्चि꣢त् । म꣣नः । चि꣢त् । म꣡न꣢꣯सः । प꣡तिः꣢꣯ ॥१४४८॥

Mantra without Swara
इन्द्राय सोम पातवे मदाय परि षिच्यसे । मनश्चिन्मनसस्पतिः ॥

इन्द्राय । सोम । पातवे । मदाय । परि । सिच्यसे । मनश्चित् । मनः । चित् । मनसः । पतिः ॥१४४८॥

Samveda - Mantra Number : 1448
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 13; Khand » 2;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (सोम) रसागार परमेश ! (मनश्चित्) मन को चेतानेवाले, (मनसः पतिः) मन के अधीश्वर, आप (इन्द्राय) जीवात्मा के (पातवे) पान के लिए और (मदाय) उत्साह के लिए (परिषिच्यसे) जीवात्मा में सींचे जा रहे हो ॥५॥
Essence
परमात्मा के ध्यान से प्राप्त हुआ आनन्दरस मन, बुद्धि, प्राण आदि को चेतनामय करता हुआ उपासक को जागरूक किये रखता है ॥५॥
Subject
अब परमात्मा को कहते हैं।