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Samveda Mantra 1399

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ꣣स्य꣢ प्रे꣣षा꣢ हे꣣म꣡ना꣢ पू꣣य꣡मा꣢नो दे꣣वो꣢ दे꣣वे꣢भिः꣢ स꣡म꣢पृक्त꣣ र꣡स꣢म् । सु꣣तः꣢ प꣣वि꣢त्रं꣣ प꣡र्ये꣢ति꣣ रे꣡भ꣢न्मि꣣ते꣢व꣣ स꣡द्म꣢ पशु꣣म꣢न्ति꣣ हो꣡ता꣢ ॥१३९९॥

अ꣣स्य꣢ । प्रे꣣षा꣢ । हे꣣म꣡ना꣢ । पू꣣य꣢मा꣢नः । दे꣣वः꣢ । दे꣣वे꣡भिः꣢ । सम् । अ꣣पृक्त । र꣡स꣢꣯म् । सु꣣तः꣢ । प꣣वि꣡त्र꣢म् । प꣡रि꣢꣯ । ए꣣ति । रे꣡भ꣢꣯न् । मि꣣ता꣢ । इ꣣व । स꣡द्म꣢꣯ । प꣣शुम꣡न्ति꣢ । हो꣡ता꣢꣯ ॥१३९९॥

Mantra without Swara
अस्य प्रेषा हेमना पूयमानो देवो देवेभिः समपृक्त रसम् । सुतः पवित्रं पर्येति रेभन्मितेव सद्म पशुमन्ति होता ॥

अस्य । प्रेषा । हेमना । पूयमानः । देवः । देवेभिः । सम् । अपृक्त । रसम् । सुतः । पवित्रम् । परि । एति । रेभन् । मिता । इव । सद्म । पशुमन्ति । होता ॥१३९९॥

Samveda - Mantra Number : 1399
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 3;

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1 Bhashyas
Meaning
(अस्य) इस पवमान सोम अर्थात् पवित्रतादायक अन्तर्यामी जगदीश्वर की (प्रेषा) प्रेरणा से और (हेमना) ज्योति से (पूयमानः) पवित्र किया जाता हुआ (देवः) प्रकाशक वा तापमय सूर्य (देवेभिः) प्रकाशक वा सन्तापक किरणों द्वारा (रसम्) भूमि के जल से (समपृक्त) सम्पर्क करता है। (सुतः) भाप बनाकर ऊपर प्रेरित किया हुआ तथा मेघ के आकार को प्राप्त हुआ वह जल (रेभन्) विद्युद्गर्जना करता हुआ (पवित्रम्) अन्तरिक्ष में (पर्येति) परिभ्रमण करता है, (इव) जैसे (होता) होता नामक ऋत्विज् (मिता) निर्माण किये हुए (पशुमन्ति) धेनुओं से युक्त (सद्म) गो-सदनों में, गोदुग्ध पाने के लिए (पर्येति) चक्कर काटा करता है ॥१॥ यहाँ उपमालङ्कार है ॥१॥
Essence
जो यह सूर्य अपने ताप से भूमि पर स्थित जल को भाप बनाकर अन्तरिक्ष में बादलों को रचता और बरसाता है, वह सब परमेश्वर की ही महिमा है ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा की व्याख्या पूर्वार्चिक में ५२६ क्रमाङ्क पर जीवात्मा-परमात्मा के विषय में की जा चुकी है। यहाँ सूर्य के वर्णन द्वारा परमात्मा की महिमा प्रकाशित करते हैं।