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Samveda Mantra 1380

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यः꣡ स्नीहि꣢꣯तीषु पू꣣र्व्यः꣡ सं꣢जग्मा꣣ना꣡सु꣢ कृ꣣ष्टि꣡षु꣢ । अ꣡र꣢क्षद्दा꣣शु꣢षे꣣ ग꣡य꣢म् ॥१३८०॥

यः । स्नीहितीषु । पूर्व्यः । सञ्जग्मानासु । सम् । जग्मानासु । कृष्टिषु । अरक्षत् । दाशुषे । गयम् ॥१३८०॥

Mantra without Swara
यः स्नीहितीषु पूर्व्यः संजग्मानासु कृष्टिषु । अरक्षद्दाशुषे गयम् ॥

यः । स्नीहितीषु । पूर्व्यः । सञ्जग्मानासु । सम् । जग्मानासु । कृष्टिषु । अरक्षत् । दाशुषे । गयम् ॥१३८०॥

Samveda - Mantra Number : 1380
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 12; Khand » 1;

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Meaning
(पूर्व्यः) पूर्वजों से साक्षात्कार किया गया (यः) जो अग्रनायक परमेश्वर (स्नीहितीषु) वध करनेवाली (कृष्टिषु) शत्रु-प्रजाओं के (संजग्मानासु) मुठभेड़ करने पर (दाशुषे) आत्मसमर्पण करनेवाले उपासक के लिए (गयम्) आश्रय को (अरक्षत्) सुरक्षित करता है, उस [(अग्नये) अग्रनायक परमेश्वर के लिए, हम (मन्त्रं वोचेम) वेदमन्त्रों का उच्चारण करें]४ ॥२॥
Essence
परमेश्वरोपासक के मार्ग से सब विघ्न नष्ट हो जाते हैं, परमेश्वर उसे अपना सुरक्षित आश्रय और दिव्य सम्पदाएँ प्रदान करता है ॥२॥
Subject
आगे पुनः उसी विषय का कथन है।