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Samveda Mantra 1376

1875 Mantra
Devata- आत्मा सूर्यो वा Rishi- सार्पराज्ञी Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡यं गौः पृश्नि꣢꣯रक्रमी꣣द꣡स꣢दन्मा꣣त꣡रं꣢ पु꣣रः꣢ । पि꣣त꣡रं꣢ च प्र꣣य꣡न्त्स्वः꣢ ॥१३७६॥

आ꣢ । अ꣣य꣢म् । गौः । पृ꣡श्निः꣢꣯ । अ꣣कमीत् । अ꣡स꣢꣯दत् । मा꣣त꣡र꣢म् । पु꣣रः꣢ । पि꣣त꣡र꣢म् । च꣣ । प्रय꣢न् । प्र꣣ । य꣢न् । स्वऽ३रि꣡ति꣢ ॥१३७६॥

Mantra without Swara
आयं गौः पृश्निरक्रमीदसदन्मातरं पुरः । पितरं च प्रयन्त्स्वः ॥

आ । अयम् । गौः । पृश्निः । अकमीत् । असदत् । मातरम् । पुरः । पितरम् । च । प्रयन् । प्र । यन् । स्वऽ३रिति ॥१३७६॥

Samveda - Mantra Number : 1376
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 11; Khand » 3;

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1 Bhashyas
Meaning
(अयम्) यह (पृश्निः) रंगीला (गौः) गतिमय चन्द्रलोक (आ अक्रमीत्) उदित हुआ है, जो (पुरः) पश्चिम से पूर्व की ओर (मातरम्) माता पृथिवी के चारों ओर (असदत्) गति करता है और (पितरम्) पितृस्थानीय (स्वः च) सूर्य की भी (प्रयन्) परिक्रमा करता है ॥१॥
Essence
चन्द्रमा पृथिवी से अलग हुआ पिण्ड है, ऐसा वैज्ञानिक लोग मानते हैं। इसलिए पृथिवी चन्द्रमा की माता है। सूर्य के प्रभाव से ही वह पिण्ड पृथिवी से अलग हुआ, इस दृष्टि से सूर्य चन्द्रमा का पिता है। चन्द्रमा पृथिवी की परिक्रमा करता-करता पृथिवी के साथ-साथ सूर्य की भी परिक्रमा करता है, ऐसा खगोल शास्त्रवेत्ताओं का निरीक्षण है ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा की व्याख्या पूर्वार्चिक में ६३० क्रमाङ्क पर सूर्य, भूगोल, परमात्मा, जीवात्मा तथा स्तोता इन पाँचों पक्षों में की जा चुकी है। यहाँ चन्द्रमा और सूर्य का सम्बन्ध वर्णन करते हैं।