Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1302

1875 Mantra
Devata- पवमानाध्येता Rishi- पवित्र आङ्गिरसो वा वसिष्ठो वा उभौ वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ये꣡न꣢ दे꣣वाः꣢ प꣣वि꣡त्रे꣢णा꣣त्मा꣡नं꣢ पु꣣न꣢ते꣣ स꣡दा꣢ । ते꣡न꣢ स꣣ह꣡स्र꣢धारेण पावमा꣣नीः꣡ पु꣢नन्तु नः ॥१३०२

ये꣡न꣢꣯ । दे꣣वाः꣢ । प꣣वि꣡त्रे꣢ण । आ꣣त्मा꣡न꣢म् । पु꣣न꣡ते꣢ । स꣡दा꣢꣯ । ते꣡न꣢꣯ । स꣣ह꣡स्र꣢धारेण । स꣣ह꣡स्र꣢ । धा꣣रेण । पावमानीः꣣ । पु꣣नन्तु । नः ॥१३०२॥

Mantra without Swara
येन देवाः पवित्रेणात्मानं पुनते सदा । तेन सहस्रधारेण पावमानीः पुनन्तु नः ॥१३०२

येन । देवाः । पवित्रेण । आत्मानम् । पुनते । सदा । तेन । सहस्रधारेण । सहस्र । धारेण । पावमानीः । पुनन्तु । नः ॥१३०२॥

Samveda - Mantra Number : 1302
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 7;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(देवाः) दिव्यगुणों से युक्त विद्वान् लोग (येन पवित्रेण) जिस पवित्र ब्रह्मानन्द से (आत्मानम्) अपने आत्मा को (सदा) हमेशा (पुनते) पवित्र करते हैं, (तेन सहस्रधारेण) उस हजार धाराओं से बहनेवाले दिव्य आनन्द से (पावमानीः) पवमान देवतावाली ऋचाएँ (नः) हमें (पुनन्तु) पवित्र करें ॥५॥
Essence
पावमानी ऋचाओं के गान से और उनमें वर्णित रसमय परमात्मा में ध्यान लगाने से कोई अद्वितीय दिव्य आनन्दरस का प्रवाह बहता हुआ उपासकों के चित्तों को पवित्र कर जाता है ॥५॥
Subject
अगले मन्त्र में फिर वेदाध्ययन हमें क्या प्राप्त कराये, यह कहा गया है।