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Samveda Mantra 1297

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- राहूगण आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ दे꣣वः꣢ क꣣वि꣡ने꣢षि꣣तो꣢३꣱ऽभि꣡ द्रोणा꣢꣯नि धावति । इ꣢न्दु꣣रि꣡न्द्रा꣢य म꣣ꣳह꣡य꣢न् ॥१२९७॥

सः꣢ । दे꣣वः꣢ । क꣣वि꣡ना꣢ । इ꣣षितः꣢ । अ꣣भि꣢ । द्रो꣡णा꣢꣯नि । धा꣣वति । इ꣡न्दुः꣢꣯ । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । म꣣ꣳह꣡य꣢न् ॥१२९७॥

Mantra without Swara
स देवः कविनेषितो३ऽभि द्रोणानि धावति । इन्दुरिन्द्राय मꣳहयन् ॥

सः । देवः । कविना । इषितः । अभि । द्रोणानि । धावति । इन्दुः । इन्द्राय । मꣳहयन् ॥१२९७॥

Samveda - Mantra Number : 1297
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 6;

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1 Bhashyas
Meaning
(कविना) मेधावी गुरु से (इषितः) प्रेरित (सः) वह (देवः) स्तुतिकर्ता (इन्दुः) तेजस्वी जीवात्मा (इन्द्राय) परमात्मा को (मंहयन्) आत्मसमर्पण करता हुआ (द्रोणानि अभि) लक्ष्यों की ओर (विधावति) वेग से दौड़ता है ॥६॥
Essence
परमात्मा के प्रति आत्मसमर्पण करने से जीवात्मा में कोई विलक्षण शक्ति उत्पन्न हो जाती है, जिससे वह सब विघ्नों को दूर फेंकता हुआ लक्ष्य तक जा पहुँचता है ॥६॥ इस खण्ड में परमात्मा और जीवात्मा के विषयों का वर्णन होने से इस खण्ड की पूर्व खण्ड के साथ सङ्गति है ॥ दशम अध्याय में षष्ठ खण्ड समाप्त ॥
Subject
अगले मन्त्र में जीवात्मा का विषय है।