Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1290

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- नृमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ शु꣣꣬ष्म्य꣢꣯सिष्यदद꣣न्त꣡रि꣢क्षे꣣ वृ꣢षा꣣ ह꣡रिः꣢ । पु꣣ना꣢꣫न इन्दु꣣रि꣢न्द्र꣣मा꣡ ॥१२९०॥

ए꣣षः꣢ । शु꣣ष्मी꣢ । अ꣣सिष्यदत् । अन्त꣡रि꣢क्षे । वृ꣡षा꣢꣯ । ह꣡रिः꣢꣯ । पु꣣नानः꣢ । इ꣡न्दुः꣢꣯ । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । आ ॥१२९०॥

Mantra without Swara
एष शुष्म्यसिष्यददन्तरिक्षे वृषा हरिः । पुनान इन्दुरिन्द्रमा ॥

एषः । शुष्मी । असिष्यदत् । अन्तरिक्षे । वृषा । हरिः । पुनानः । इन्दुः । इन्द्रम् । आ ॥१२९०॥

Samveda - Mantra Number : 1290
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 5;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(एषः) यह (शुष्मी) बलवान्, (वृषा) आनन्दवर्षक, (हरिः) पापों को हरनेवाला (इन्दुः) रसमय परमेश्वर (इन्द्रम्) जीवात्मा को (आ पुनानः) चारों ओर से पवित्र करता हुआ (अन्तरिक्षे) मनोमय कोश में (असिष्यदत्) प्रवाहित हो रहा है ॥५॥
Essence
जैसे अन्तरिक्ष में स्थित चन्द्रमा चाँदनी के रस को प्रसारित करता है, वैसे ही हृदय-प्रदेश में स्थित परमेश्वर आनन्द-रस को प्रवाहित करता है ॥५॥
Subject
आगे फिर वही विषय है।