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Samveda Mantra 1269

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ हि꣣तो꣡ वि नी꣢꣯यते꣣ऽन्तः꣢ शु꣣न्ध्या꣡व꣢ता प꣣था꣢ । य꣡दी꣢ तु꣣ञ्ज꣢न्ति꣣ भू꣡र्ण꣢यः ॥१२६९॥

ए꣣षः꣢ । हि꣣तः꣢ । वि । नी꣣यते । अन्त꣡रिति꣢ । शु꣣न्ध्या꣡व꣢ता । प꣣था꣢ । य꣡दि꣢꣯ । तु꣣ञ्ज꣡न्ति꣢ । भू꣡र्ण꣢꣯यः ॥१२६९॥

Mantra without Swara
एष हितो वि नीयतेऽन्तः शुन्ध्यावता पथा । यदी तुञ्जन्ति भूर्णयः ॥

एषः । हितः । वि । नीयते । अन्तरिति । शुन्ध्यावता । पथा । यदि । तुञ्जन्ति । भूर्णयः ॥१२६९॥

Samveda - Mantra Number : 1269
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 2;

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1 Bhashyas
Meaning
(यदि) यदि (भूर्णयः) ज्ञान आदि से भरे हुए मनुष्य (तुञ्जन्ति) स्वयं को परमेश्वर के लिए समर्पित करते हैं, तो इस (शुन्ध्यावता पथा) शुद्धियुक्त मार्ग से (अन्तः हितः) अन्तर्मुख किया हुआ (एषः) यह सोम जीवात्मा (वि नीयते) विशेषरूप से मोक्ष की ओर ले जाया जाता है ॥४॥
Essence
अहङ्कार का परित्याग करके परमात्मा के प्रति आत्मसमर्पण से मोक्ष का मार्ग सरल हो जाता है ॥४॥
Subject
आगे फिर वही विषय है।