Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1217

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡यु꣢क्त꣣ सू꣢र꣣ ए꣡त꣢शं꣣ प꣡व꣢मानो म꣣ना꣡वधि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षेण꣣ या꣡त꣢वे ॥१२१७॥

अ꣡यु꣢꣯क्त । सू꣡रः꣢꣯ । ए꣡त꣢꣯शम् । प꣡व꣢꣯मानः । म꣣नौ꣢ । अ꣡धि꣢꣯ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षेण । या꣡त꣢꣯वे ॥१२१७॥

Mantra without Swara
अयुक्त सूर एतशं पवमानो मनावधि । अन्तरिक्षेण यातवे ॥

अयुक्त । सूरः । एतशम् । पवमानः । मनौ । अधि । अन्तरिक्षेण । यातवे ॥१२१७॥

Samveda - Mantra Number : 1217
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 5;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(सूरः) प्रेरक (पवमानः) क्रियाशील सोम परमेश्वर ने (अन्तरिक्षेण) आकाशमार्ग से (यातवे) यात्रा करने के लिए (मनौ अधि) मनुष्य के अन्दर (एतशम्) प्राणरूप अश्व को (अयुक्त) नियुक्त किया हुआ है ॥२॥
Essence
परमात्मा के साथ योग करके और प्राणसिद्धि प्राप्त करके मनुष्य आकाशमार्ग से जाना-आना कर सकते हैं ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा के कर्तृत्व का वर्णन है।