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Samveda Mantra 1168

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वत्सः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣣म꣢त्स्व꣣ग्नि꣡मव꣢꣯से वाज꣣य꣡न्तो꣢ हवामहे । वा꣡जे꣣षु चि꣣त्र꣢रा꣣धसम् ॥११६८॥

स꣣म꣡त्सु꣢ । स꣣ । म꣡त्सु꣢꣯ । अ꣣ग्नि꣢म् । अ꣡व꣢꣯से । वा꣣ज꣡यन्तः꣢ । ह꣣वामहे । वा꣡जे꣢꣯षु । चि꣣त्र꣡रा꣢धसम् । चि꣣त्र꣢ । रा꣣धसम् ॥११६८॥

Mantra without Swara
समत्स्वग्निमवसे वाजयन्तो हवामहे । वाजेषु चित्रराधसम् ॥

समत्सु । स । मत्सु । अग्निम् । अवसे । वाजयन्तः । हवामहे । वाजेषु । चित्रराधसम् । चित्र । राधसम् ॥११६८॥

Samveda - Mantra Number : 1168
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 6;

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1 Bhashyas
Meaning
(समत्सु) देवासुरसंग्रामों में (वाजयन्तः) बल की कामना करते हुए, हम (अवसे) रक्षा के लिए (अग्निम्) अग्रनायक जगदीश्वर को (हवामहे) पुकारते हैं। (चित्रराधसम्) अद्भुत धनवाले उसे (वाजेषु) धनप्राप्ति के निमित्त (हवामहे) हम पुकारते हैं ॥३॥
Essence
परमेश्वर बल देकर ही लोगों की रक्षा करता है। अद्भुत दिव्य एवं भौतिक धनों का स्वामी वह पुरुषार्थियों को ही धन देता है ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में फिर परमात्मा का आह्वान है।