Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1165

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते꣡ नो꣢ वृ꣣ष्टिं꣢ दि꣣व꣢꣫स्परि꣣ प꣡व꣢न्ता꣣मा꣢ सु꣣वी꣡र्य꣢म् । स्वा꣣ना꣢ दे꣣वा꣢स꣣ इ꣡न्द꣢वः ॥११६५॥

ते । नः꣣ । वृष्टि꣢म् । दि꣣वः꣢ । प꣡रि꣢꣯ । प꣡व꣢꣯न्ताम् । आ । सु꣣वी꣡र्य꣢म् । सु꣣ । वी꣡र्य꣢꣯म् । स्वा꣣नाः꣢ । दे꣣वा꣡सः꣢ । इ꣡न्द꣢꣯वः ॥११६५॥

Mantra without Swara
ते नो वृष्टिं दिवस्परि पवन्तामा सुवीर्यम् । स्वाना देवास इन्दवः ॥

ते । नः । वृष्टिम् । दिवः । परि । पवन्ताम् । आ । सुवीर्यम् । सु । वीर्यम् । स्वानाः । देवासः । इन्दवः ॥११६५॥

Samveda - Mantra Number : 1165
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 5;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(ये सोमासः) जो ज्ञान-प्रेरक विद्वान् लोग (परावति) परा विद्या के विषय में और (ये) जो (अर्वावति) अपरा विद्या के विषय में, (ये वा) और जो (अदः) इस (शर्यणावति) शरीर-विद्या के विषय में (सुन्विरे) ज्ञान देते हैं, (ये) जो विद्वान् लोग (पस्त्यानाम्) प्रजाओं के (मध्ये) अन्दर, (ये वा) और जो (पञ्चसु जनेषु) यजमान, ब्रह्मा, अध्वर्यु, होता और उद्गाता इन पाँच जनों में (सुन्विरे) ज्ञान देते हैं, (ते) वे (स्वानाः) पढ़ानेवाले (इन्दवः) ज्ञान-रस से भिगोनेवाले (देवासः) विद्वान् लोग (नः) हमारे लिए (दिवः परि) द्युतिमय परमात्मा के पास से (वृष्टिम्) आनन्दरस की वर्षा को और (सुवीर्यम्) सुवीर्य से युक्त आध्यात्मिक धन को (आ पवन्ताम्) प्रवाहित करें ॥१-३॥
Essence
आप्त विद्वान् लोग भिन्न-भिन्न लोगों को उन-उन से सम्बद्ध विद्याओं में निष्णात करके और ब्रह्मानन्द प्रदान करके सुयोग्य बनाते हैं, इसलिए उनका सबको सत्कार करना चाहिए ॥१-३॥ इस खण्ड में परमात्मा का और विद्वान् गुरुओं के पास से प्राप्त होनेवाले ज्ञान-रस तथा ब्रह्मानन्द-रस का वर्णन होने से इस खण्ड की पूर्व खण्ड के साथ सङ्गति जाननी चाहिए ॥ अष्टम अध्याय में पञ्चम खण्ड समाप्त ॥
Subject
इस सम्पूर्ण सूक्त में एक वाक्य में विद्वानों से प्राप्त कराये जाते हुए ब्रह्मानन्द का वर्णन है।