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Samveda Mantra 1111

1875 Mantra
Devata- विश्वे देवाः Rishi- भुवन आप्त्यः साधनो वा भौवनः Chhand- द्विपदा त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
य꣣ज्ञं꣡ च꣢ नस्त꣣꣬न्वं꣢꣯ च प्र꣣जां꣡ चा꣢दि꣣त्यै꣡रिन्द्रः꣢꣯ स꣣ह꣡ सी꣢षधातु ॥११११॥

य꣣ज्ञ꣢म् । च꣣ । नः । तन्व꣢म् । च꣣ । प्रजा꣢म् । प्र꣣ । जा꣢म् । च꣣ । आदित्यैः꣢ । आ꣣ । दित्यैः꣢ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । स꣣ह꣢ । सी꣣षधातु ॥११११॥

Mantra without Swara
यज्ञं च नस्तन्वं च प्रजां चादित्यैरिन्द्रः सह सीषधातु ॥

यज्ञम् । च । नः । तन्वम् । च । प्रजाम् । प्र । जाम् । च । आदित्यैः । आ । दित्यैः । इन्द्रः । सह । सीषधातु ॥११११॥

Samveda - Mantra Number : 1111
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 7;

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1 Bhashyas
Meaning
(इन्द्रः) हमारा जीवात्मा (आदित्यैः सह) सूर्य के समान ज्ञानसाधक मन-बुद्धि सहित ज्ञानेन्द्रियों के साथ मिलकर, अथवा (इन्द्रः) राष्ट्र का राजा (आदित्यैः सह) विद्वानों के साथ मिलकर (नः) हमारे (यज्ञं च) यज्ञ को, (तन्वं च) शरीर को (प्रजां च) और सन्तति वा राष्ट्र की प्रजा को (सीषधातु) सिद्ध करे ॥२॥ यहाँ श्लेषालङ्कार है ॥२॥
Essence
जीवात्मा मन, बुद्धि और ज्ञानेन्द्रियों का उपयोग करके सब कुछ सिद्ध कर सकता है। उसी प्रकार विद्वान् प्रजाजन, राजा और राज्याधिकारी मिलकर पुरुषार्थ से सब यज्ञ-सुख, देह-सुख, सन्तति-सुख और प्रजा-सुख सिद्ध कर सकते हैं ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में अध्यात्म विषय तथा राष्ट्र का विषय वर्णित है।