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Samveda Mantra 1100

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- पर्वतनारदौ काण्वौ Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
अ꣣यं꣡ दक्षा꣢꣯य꣣ सा꣡ध꣢नो꣣ऽय꣡ꣳ शर्धा꣢꣯य वी꣣त꣡ये꣢ । अ꣣यं꣢ दे꣣वे꣢भ्यो꣣ म꣡धु꣢मत्तरः सु꣣तः꣢ ॥११००॥

अय꣢म् । द꣡क्षा꣢꣯य । सा꣡ध꣢꣯नः । अ꣡य꣢म् । श꣡र्धा꣢꣯य । वी꣣त꣡ये꣢ । अ꣣य꣢म् । दे꣣वे꣡भ्यः꣢ । म꣡धु꣢꣯मत्तरः । सु꣣तः꣢ ॥११००॥

Mantra without Swara
अयं दक्षाय साधनोऽयꣳ शर्धाय वीतये । अयं देवेभ्यो मधुमत्तरः सुतः ॥

अयम् । दक्षाय । साधनः । अयम् । शर्धाय । वीतये । अयम् । देवेभ्यः । मधुमत्तरः । सुतः ॥११००॥

Samveda - Mantra Number : 1100
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 6;

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1 Bhashyas
Meaning
(साधनः) सिद्धिप्रदाता (अयम्) यह पवमान सोम अर्थात् पवित्रकर्ता परमेश्वर (दक्षाय) आत्मबल के लिए होता है। (अयम्) यह परमेश्वर (शर्धाय) उत्साह देने के लिए और (वीतये) लोगों की प्रगति के लिए होता है। (सुतः) ध्यान किया गया (अयम्) यह (देवेभ्यः) विद्वान् सदाचारी उपासकों के लिए (मधुमत्तरः) अतिशय मधुर होता है ॥३॥
Essence
श्रद्धा से उपासना किया गया परमेश्वर उपासक को आत्मबल, उत्साह, प्रगति तथा वाणी, कर्म एवं व्यवहार में मधुरता प्रदान करता है ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में परमात्मा मनुष्यों का क्या उपकार करता है, यह कहते हैं।