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Samveda Mantra 1089

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡था꣢ ते꣣ अ꣡न्त꣢मानां वि꣣द्या꣡म꣢ सुमती꣣ना꣢म् । मा꣢ नो꣣ अ꣡ति꣢ ख्य꣣ आ꣡ ग꣢हि ॥१०८९॥

अ꣡थ꣢꣯ । ते꣣ । अ꣡न्त꣢꣯मानाम् । वि꣣द्या꣡म꣢ । सु꣣मतीना꣢म् । सु꣣ । मतीना꣢म् । मा । नः꣣ । अ꣡ति꣢꣯ । ख्यः꣣ । आ꣢ । ग꣣हि ॥१०८९॥

Mantra without Swara
अथा ते अन्तमानां विद्याम सुमतीनाम् । मा नो अति ख्य आ गहि ॥

अथ । ते । अन्तमानाम् । विद्याम । सुमतीनाम् । सु । मतीनाम् । मा । नः । अति । ख्यः । आ । गहि ॥१०८९॥

Samveda - Mantra Number : 1089
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 5;

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1 Bhashyas
Meaning
हे इन्द्र अर्थात् परमात्मा, राजा, आचार्य, योग के गुरु वा शिल्पकार ! (अथ) और हम (ते) आपकी (अन्तमानाम्) समीपतम (सुमतीनाम्) सुमतियों को (विद्याम) जानें। आप (नः अति) हमें लाँघकर (मा ख्यः) अपना उपदेश मत करो, प्रत्युत (आगहि) हमारे पास आओ और आकर अपनी देनों का पात्र हमें बनाओ ॥३॥
Essence
परमात्मा, राजा, आचार्य, योगी और शिल्पी के जो ज्ञान और कर्म हैं, उनसे उपकार लेकर अपने आपको उन्नत करना चाहिए ॥३॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः उन्हीं को सम्बोधन किया गया है।