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Samveda Mantra 1074

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- श्यावाश्व आत्रेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तो꣣शा꣡सा꣢ रथ꣣या꣡वा꣢ना वृत्र꣣ह꣡णाप꣢꣯राजिता । इ꣡न्द्रा꣢ग्नी꣣ त꣡स्य꣢ बोधतम् ॥१०७४॥

तोशा꣡सा꣢ । र꣣थया꣡वा꣢ना । र꣣थ । या꣡वा꣢꣯ना । वृ꣣त्रह꣡णा꣢ । वृ꣣त्र । ह꣡ना꣢꣯ । अ꣡प꣢꣯राजिता । अ । प꣣राजिता । इ꣡न्द्रा꣢꣯ग्नी । इ꣡न्द्र꣢꣯ । अ꣣ग्नीइ꣡ति꣢ । त꣡स्य꣢꣯ । बो꣣धतम् ॥१०७४॥

Mantra without Swara
तोशासा रथयावाना वृत्रहणापराजिता । इन्द्राग्नी तस्य बोधतम् ॥

तोशासा । रथयावाना । रथ । यावाना । वृत्रहणा । वृत्र । हना । अपराजिता । अ । पराजिता । इन्द्राग्नी । इन्द्र । अग्नीइति । तस्य । बोधतम् ॥१०७४॥

Samveda - Mantra Number : 1074
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 3;

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Meaning
हे (इन्द्राग्नी) जीवात्मा और प्राण एवं राजा और सेनापति ! (तोशासा) सन्तुष्टि करनेवाले, (रथयावाना) देहरूप रथ से वा विमान आदि यान से गमन करनेवाले, (वृत्रहणा) शत्रु, विघ्न, पाप आदि को नष्ट करनेवाले, (अपराजिता) पराजित न होनेवाले तुम दोनों (तस्य) उस-उस कर्म को (बोधतम्) करना वा कराना जानो ॥२॥
Essence
जीवात्मा और प्राण एवं राजा और सेनापति को नेता बनाकर वैयक्तिक, सामाजिक और राष्ट्रिय उन्नति सबको सिद्ध करनी चाहिए ॥२॥
Subject
आगे फिर वही विषय वर्णित है।

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