Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1034

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡सृ꣢क्षत꣣ प्र꣢ वा꣣जि꣡नो꣢ ग꣣व्या꣡ सोमा꣢꣯सो अश्व꣣या꣢ । शु꣣क्रा꣡सो꣢ वीर꣣या꣡शवः꣢꣯ ॥१०३४॥

अ꣡सृ꣢꣯क्षत । प्र । वा꣣जि꣡नः꣢ । ग꣣व्या꣢ । सो꣡मा꣢꣯सः । अ꣣श्वया । शु꣣क्रा꣡सः꣢ । वी꣣रया꣢ । आ꣣श꣡वः꣢ ॥१०३४॥

Mantra without Swara
असृक्षत प्र वाजिनो गव्या सोमासो अश्वया । शुक्रासो वीरयाशवः ॥

असृक्षत । प्र । वाजिनः । गव्या । सोमासः । अश्वया । शुक्रासः । वीरया । आशवः ॥१०३४॥

Samveda - Mantra Number : 1034
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 1;

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(वाजिनः) बलवान्, (शुक्रासः) पवित्र, (आशवः) शीघ्रगामी (सोमासः) ब्रह्मानन्द-रस (गव्या) इन्द्रियबलों की प्राप्ति की इच्छा से, (अश्वया) प्राण-बलों की प्राप्ति की इच्छा से और (वीरया) वीर-भावों की प्राप्ति की इच्छा से (प्र असृक्षत) परमेश्वर के पास से अभिषुत किये जा रहे हैं ॥१॥
Essence
उपासक के आत्मा में जब ब्रह्मानन्द-रस की धाराएँ बहती हैं, तब मन, बुद्धि, प्राण, इन्द्रियों आदि का सात्त्विक बल स्वयं ही उपस्थित हो जाता है ॥१॥
Subject
प्रथम ऋचा पूर्वार्चिक में ४८२ क्रमाङ्क पर भक्तिरस के विषय में व्याख्यात हो चुकी है। यहाँ ब्रह्मानन्द-रस का प्रवाह वर्णित है।