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Rigveda Mandal 7 / Sukta 41 / Mantra 3

104 Sukta
7 Mantra
7/41/3
Devata- भगः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
भग॒ प्रणे॑त॒र्भग॒ सत्य॑राधो॒ भगे॒मां धिय॒मुद॑वा॒ दद॑न्नः। भग॒ प्र णो॑ जनय॒ गोभि॒रश्वै॒र्भग॒ प्र नृभि॑र्नृ॒वन्तः॑ स्याम ॥३॥

भग॑ । प्रऽने॑त॒रिति॒ प्रऽने॑तः । भग॑ । सत्य॑ऽराधः । भग॑ । इ॒माम् । धिय॑म् । उत् । अ॒व॒ । दद॑त् । नः॒ । भग॑ । प्र । नः॒ । ज॒न॒य॒ । गोभिः॑ । अश्वैः॑ । भग॑ । प्र । नृऽभिः॑ । नृ॒ऽवन्तः॑ । स्या॒म॒ ॥

Mantra without Swara
भग प्रणेतर्भग सत्यराधो भगेमां धियमुदवा ददन्नः। भग प्र णो जनय गोभिरश्वैर्भग प्र नृभिर्नृवन्तः स्याम ॥

भग। प्रऽनेतरिति प्रऽनेतः। भग। सत्यऽराधः। भग। इमाम्। धियम्। उत्। अव। ददत्। नः। भग। प्र। नः। जनय। गोभिः। अश्वैः। भग। प्र। नृऽभिः। नृऽवन्तः। स्याम ॥३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 4 Varga » 8 Mantra » 3

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Meaning
हे (भग) सकलैश्वर्य्ययुक्त (प्रणेतः) उत्तमता से प्राप्ति करानेवाले (भग, सत्यराधः) अत्यन्त सेवा करने योग्य प्रकृतिरूप धनयुक्त (भग) सकल ऐश्वर्य देनेवाले ईश्वर ! आप कृपा कर (नः) हम लोगों के लिये (इमाम्) इस प्रशंसायुक्त (धियम्) उत्तम बुद्धि को (ददत्) देते हुए हम लोगों की (उत्, अव) उत्तमता से रक्षा कीजिये, हे (भग) सर्वसामग्री युक्त ! (नः) हम लोगों के लिये (गोभिः) गौवें वा पृथिवी आदि से (अश्वैः) वा शीघ्रगामी घोड़ा वा पवन वा बिजुली आदि से (प्र, जनय) उत्तमता से उत्पत्ति दीजिये, हे (भग) सकलैश्वर्य्य युक्त ! आप हम लोगों को (नृभिः) नायक श्रेष्ठ मनुष्यों से (प्र) उत्तम उत्पत्ति दीजिये जिस से हम लोग (नृवन्तः) बहुत उत्तम मनुष्य युक्त (स्याम) हों ॥३॥
Essence
जो मनुष्य ईश्वर की आज्ञा, प्रार्थना, ध्यान और उपासना का आचरण पहिले करके पुरुषार्थ करते हैं, वे धर्मात्मा होकर अच्छे सहायवान् हुए सकल ऐश्वर्य को प्राप्त होते हैं ॥३॥
Subject
फिर मनुष्यों को ईश्वर की प्रार्थना क्यों करनी चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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