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Rigveda Mandal 7 / Sukta 38 / Mantra 3

104 Sukta
8 Mantra
7/38/3
Devata- सविता Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अपि॑ ष्टु॒तः स॑वि॒ता दे॒वो अ॑स्तु॒ यमा चि॒द्विश्वे॒ वस॑वो गृ॒णन्ति॑। स नः॒ स्तोमा॑न्नम॒स्य१॒॑श्चनो॑ धा॒द्विश्वे॑भिः पातु पा॒युभि॒र्नि सू॒रीन् ॥३॥

अपि॑ । स्तु॒तः । स॒वि॒ता । दे॒वः । अ॒स्तु॒ । यम् । आ । चि॒त् । विश्वे॑ । वस॑वः । गृ॒णन्ति॑ । सः । नः॒ । स्तोमा॑न् । न॒म॒स्यः॑ । चनः॑ । धा॒त् । विश्वे॑भिः । पा॒तु॒ । पा॒युऽभिः॑ । नि । सू॒रीन् ॥

Mantra without Swara
अपि ष्टुतः सविता देवो अस्तु यमा चिद्विश्वे वसवो गृणन्ति। स नः स्तोमान्नमस्य१श्चनो धाद्विश्वेभिः पातु पायुभिर्नि सूरीन् ॥

अपि। स्तुतः। सविता। देवः। अस्तु। यम्। आ। चित्। विश्वे। वसवः। गृणन्ति। सः। नः। स्तोमान्। नमस्यः। चनः। धात्। विश्वेभिः। पातु। पायुऽभिः। नि। सूरीन् ॥३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 4 Varga » 5 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (यम्, चित्) जिस परमेश्वर की (विश्वे) सब (वसवः) वे विद्वान् जन जिन में विद्या वसती है (गृणन्ति) स्तुति कराते हैं वह (सविता) सब को उत्पन्न करनेवाला (देवः) सूर्यादिकों का भी प्रकाशक ईश्वर हम लोगों से (आ, स्तुतः) अच्छे प्रकार स्तुति को प्राप्त (अस्तु) हो और वह (अपि) भी (नमस्यः) नमस्कार करने योग्य हो (नः) हमारी (स्तोमान्) प्रशंसाओं को और (चनः) अन्नादि ऐश्वर्य को भी (धात्) धारण करे तथा (सः) वह (विश्वेभिः) सब के साथ (पायुभिः) रक्षाओं से (सूरीन्) विद्वानों की (नि, पातु) निरन्तर रक्षा करे ॥३॥
Essence
हे मनुष्यो ! जिस ईश्वर की सब धर्मात्मा सज्जन प्रशंसा करते हैं, जो हम लोगों की निरन्तर रक्षा करता, हम लोगों के लिये समस्त विश्व का विधान करता है, उसी की हम लोग सदा प्रशंसा करें ॥३॥
Subject
फिर कौन सब को प्रशंसा करने योग्य है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥