Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 7 / Sukta 36 / Mantra 3

104 Sukta
9 Mantra
7/36/3
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ वात॑स्य॒ ध्रज॑तो रन्त इ॒त्या अपी॑पयन्त धे॒नवो॒ न सूदाः॑। म॒हो दि॒वः सद॑ने॒ जाय॑मा॒नोऽचि॑क्रदद्वृष॒भः सस्मि॒न्नूध॑न् ॥३॥

आ वात॑स्य । ध्रज॑तः । र॒न्ते॒ । इ॒त्याः । अपी॑पयन्त । धे॒नवः॑ । न । सूदाः॑ । म॒हः । दि॒वः । सद॑ने । जाय॑मानः । अचि॑क्रदत् । वृ॒ष॒भः । सस्मि॑न् । ऊध॑न् ॥

Mantra without Swara
आ वातस्य ध्रजतो रन्त इत्या अपीपयन्त धेनवो न सूदाः। महो दिवः सदने जायमानोऽचिक्रदद्वृषभः सस्मिन्नूधन् ॥

आ वातस्य। ध्रजतः। रन्ते। इत्याः। अपीपयन्त। धेनवः। न। सूदाः। महः। दिवः। सदने। जायमानः। अचिक्रदत्। वृषभः। सस्मिन्। ऊधन् ॥३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 4 Varga » 1 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (महः) महान् (दिवः) प्रकाश के (सदने) घर में (जायमानः) उत्पन्न होता हुआ (वृषभः) बलिष्ठ (सस्मिन्) अन्तरिक्ष में और (ऊधन्) उषाकाल में (अचिक्रदत्) आह्वान करता जिस में (ध्रजतः) जाते हुए (वातस्य) पवन के सम्बन्धी (सूदाः) पाप करनेवालों के (न) समान (धेनवः) गायें (इत्याः) जो कि पाने योग्य हैं उन को (रन्ते) रमता और सब को (आ, अपीपयन्त) सब ओर से बढ़ाता है, उस सूर्य को युक्ति के साथ उत्तम प्रयोग में लाओ ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे मनुष्यो ! जैसे प्रकाशमान पदार्थों में उत्पन्न हुआ रवि अन्तरिक्ष में प्रकाशित होता है वा जिस अन्तरिक्ष में सब प्राणी रमते हैं, उसी में सब सुख को प्राप्त होते हैं ॥३॥
Subject
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥