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Rigveda Mandal 7 / Sukta 35 / Mantra 6

104 Sukta
15 Mantra
7/35/6
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
शं न॒ इन्द्रो॒ वसु॑भिर्दे॒वो अ॑स्तु॒ शमा॑दि॒त्येभि॒र्वरु॑णः सु॒शंसः॑। शं नो॑ रु॒द्रो रु॒द्रेभि॒र्जला॑षः॒ शं न॒स्त्वष्टा॒ ग्नाभि॑रि॒ह शृ॑णोतु ॥६॥

शम् । नः॒ । इन्द्रः॑ । वसु॑ऽभिः । दे॒वः । अ॒स्तु॒ । शम् । आ॑आ॒दि॒त्येभिः । वरु॑णः । सु॒ऽशंसः॑ । शम् । नः॒ । रु॒द्रः । रु॒द्रेभिः॑ । जला॑षः । शम् । नः॒ । त्वष्टा॑ । ग्नाभिः॑ । इ॒ह । शृ॒णो॒तु॒ ॥

Mantra without Swara
शं न इन्द्रो वसुभिर्देवो अस्तु शमादित्येभिर्वरुणः सुशंसः। शं नो रुद्रो रुद्रेभिर्जलाषः शं नस्त्वष्टा ग्नाभिरिह शृणोतु ॥

शम्। नः। इन्द्रः। वसुऽभिः। देवः। अस्तु। शम्। आदित्येभिः। वरुणः। सुऽशंसः। शम्। नः। रुद्रः। रुद्रेभिः। जलाषः। शम्। नः। त्वष्टा। ग्नाभिः। इह। शृणोतु ॥६॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 29 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे जगदीश्वर वा विद्वान् आपके सहाय से और परीक्षा से (इह) यहाँ (वसुभिः) पृथिव्यादिकों के साथ (देवः) दिव्य गुणकर्मस्वभावयुक्त (इन्द्रः) बिजुली या सूर्य (नः) हम लोगों के लिये (शम्) सुखरूप और (आदित्येभिः) संवत्सर के महीनों के साथ (सुशंसः) प्रशंसित प्रशंसा करने योग्य (वरुणः) जल समुदाय (नः) हम लोगों के लिये (शम्) सुखरूप (अस्तु) हो (रुद्रेभिः) जीव प्राणों के साथ (जलाषः) दुःख निवारण करनेवाला (रुद्रः) परमात्मा वा जीव (नः) हम लोगों के लिये (शम्) सुखरूप हो (ग्नाभिः) वाणियों के साथ (त्वष्टा) सर्व वस्तुविच्छेद करनेवाला अग्नि के समान परीक्षक विद्वान् (नः) हम लोगों के लिये (शम्) सुख (शृणोतु) सुने ॥६॥
Essence
जो पृथिवी, आदित्य और वायु की विद्या से ईश्वर, जीव और प्राणों को जान यहाँ इनकी विद्या को पढ़ा परीक्षा कर सब को विद्वान् और उद्योगी करते हैं, वे इस संसार में किस-किस ऐश्वर्य को नहीं प्राप्त होते हैं ॥६॥
Subject
फिर विद्वानों को क्या जान के और संयुक्त कर क्या पाने योग्य है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥