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Rigveda Mandal 7 / Sukta 35 / Mantra 1

104 Sukta
15 Mantra
7/35/1
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
शं न॑ इन्द्रा॒ग्नी भ॑वता॒मवो॑भिः॒ शं न॒ इन्द्रा॒वरु॑णा रा॒तह॑व्या। शमिन्द्रा॒सोमा॑ सुवि॒ताय॒ शं योः शं न॒ इन्द्रा॑पू॒षणा॒ वाज॑सातौ ॥१॥

शम् । नः॒ । इ॒न्द्रा॒ग्नी इति॑ । भ॒व॒ता॒म् । अवः॑ऽभिः । शम् । नः॒ । इन्द्रा॒वरु॑णा । रा॒तऽह॑व्या । शम् । इन्द्रा॒सोमा॑ । सु॒वि॒ताय॑ । शम् । योः । शम् । नः॒ । इन्द्रा॑पू॒षणा । वाज॑ऽसातौ ॥

Mantra without Swara
शं न इन्द्राग्नी भवतामवोभिः शं न इन्द्रावरुणा रातहव्या। शमिन्द्रासोमा सुविताय शं योः शं न इन्द्रापूषणा वाजसातौ ॥

शम्। नः। इन्द्राग्नी इति। भवताम्। अवःऽभिः। शम्। नः। इन्द्रावरुणा। रातऽहव्या। शम्। इन्द्रासोमा। सुविताय। शम्। योः। शम्। नः। इन्द्रापूषणा। वाजऽसातौ ॥१॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे जगदीश्वर ! (वाजसातौ) संग्राम में (सुविताय) ऐश्वर्य होने के लिये (नः) हम लोगों को (अवोभिः) रक्षा आदि के साथ (इन्द्राग्नी) बिजुली और साधारण अग्नि (शम्) सुख करनेवाले (शम्) मङ्गल करनेवाले (रातहव्या) दीनी है ग्रहण करने को वस्तु जिन्होंने ऐसे (इन्द्रावरुणा) बिजुली और जल (नः) हम लोगों के लिये (शम्) सुख करनेवाले (इन्द्रासोमा) बिजुली ओषधिगण (शम्) सुखकारक (योः) सुख के निमित्त और (इन्द्रापूषणा) बिजुली और वायु (नः) हमारे लिये (शम्) आनन्द देनेवाले (भवताम्) हों, वैसा हम लोग प्रयत्न करें ॥१॥
Essence
हे जगदीश्वर ! आप की कृपा से, विद्वानों के सङ्ग से और अपने पुरुषार्थ से आप की रची हुई सृष्टि में वर्त्तमान बिजुली आदि पदार्थों से हम लोग उपकार करना कराना चाहते हैं, सो यह हम लोगों का प्रयत्न सफल हो ॥१॥
Subject
अब पन्द्रह ऋचावाले पैंतीसवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में मनुष्यों को सृष्टिपदार्थों से क्या-क्या ग्रहण करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥