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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 8

104 Sukta
25 Mantra
7/34/8
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिपाद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ह्वया॑मि दे॒वाँ अया॑तुरग्ने॒ साध॑न्नृ॒तेन॒ धियं॑ दधामि ॥८॥

ह्वया॑मि । दे॒वान् । अया॑तुः । अ॒ग्ने॒ । साध॑न् । ऋ॒तेन॑ । धिय॑म् । द॒धा॒मि॒ ॥

Mantra without Swara
ह्वयामि देवाँ अयातुरग्ने साधन्नृतेन धियं दधामि ॥

ह्वयामि। देवान्। अयातुः। अग्ने। साधन्। ऋतेन। धियम्। दधामि ॥८॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 25 Mantra » 8

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वान् ! जैसे मैं (देवान्) विद्वानों को (ह्वयामि) बुलाता हूँ (ऋतेन) सत्य व्यवहार से (साधन्) सिद्ध करता हुआ (धियम्) उत्तम बुद्धि वा शुभ कर्म को (दधामि) धारण करता हूँ और (अयातुः) जो नहीं जाता उस स्थिर से विद्या ग्रहण करता हूँ, वैसे आप कन्या पढ़ाने का निबन्ध करो ॥८॥
Essence
जो विद्वानों को बुला के और उनका सत्कार कर सत्य आचार से विद्या को धारण करते हैं, वे विद्वान् होते हैं ॥८॥
Subject
फिर अध्यापक, अध्येताओं को क्या उपदेश करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥