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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 6

104 Sukta
25 Mantra
7/34/6
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- निचृत्त्रिपाद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्मना॑ स॒मत्सु॑ हि॒नोत॑ य॒ज्ञं दधा॑त के॒तुं जना॑य वी॒रम् ॥६॥

त्मना॑ । स॒मत्ऽसु॑ । हि॒नोत॑ । य॒ज्ञम् । दधा॑त । के॒तुम् । जना॑य । वी॒रम् ॥

Mantra without Swara
त्मना समत्सु हिनोत यज्ञं दधात केतुं जनाय वीरम् ॥

त्मना। समत्ऽसु। हिनोत। यज्ञम्। दधात। केतुम्। जनाय। वीरम् ॥६॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 25 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
हे कन्याओ ! जैसे (जनाय) राजा के लिये (समत्सु) संग्रामों में (वीरम्) पूरा करनेवाले जन को प्रेरणा देते हैं, वैसे (त्मना) अपने से (केतुम्) बुद्धि को (दधात) धारण करो और (यज्ञम्) सङ्ग करने योग्य विद्याबोध को (हिनोत) बढ़ाओ ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है । जैसे शूरवीर धीमान् बुद्धिमान् राजा पुरुष उत्तम यत्न से संग्रामों को विशेषता से जीतते हैं, वैसे कन्याओं को इन्द्रियाँ जीत और विद्याओं को पाकर विजय की विशेष भावना करनी चाहिये ॥६॥
Subject
फिर कन्या विद्याप्राप्ति व्यवहार को बढ़ावें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥