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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 5

104 Sukta
25 Mantra
7/34/5
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- भुरिगार्चीगायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒भि प्र स्था॒ताहे॑व य॒ज्ञं याते॑व॒ पत्म॒न्त्मना॑ हिनोत ॥५॥

अ॒भि । प्र । स्था॒त॒ । अह॑ऽइव । य॒ज्ञम् । याता॑ऽइव । पत्म॑न् । त्मना॑ । हि॒नो॒त॒ ॥

Mantra without Swara
अभि प्र स्थाताहेव यज्ञं यातेव पत्मन्त्मना हिनोत ॥

अभि। प्र। स्थात। अहऽइव। यज्ञम्। याताऽइव। पत्मन्। त्मना। हिनोत ॥५॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 25 Mantra » 5

Bhashya

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Meaning
हे कन्याओ ! तुम विद्याप्राप्ति के लिये (अहेव) दिनों के समान (यज्ञम्) पढ़ने-पढ़ाने रूप यज्ञ के (अभि, प्र, स्थात) सब ओर से जाओ (त्मना) अपने से (पत्मन्) मार्ग में (यातेव) जाते हुए के समान (हिनोत) बढ़ाओ ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । हे कन्याओ ! जैसे दिन अनुकूल क्रम से जाते और आते हैं और जैसे बटोही जन नित्य चलते हैं, वैसे ही अनुकूल क्रम से विद्याप्राप्ति मार्ग से विद्याप्राप्तिरूप यज्ञ को बढ़ाओ ॥५॥
Subject
फिर कन्याजन कैसे विद्या को बढ़ावें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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