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Rigveda Mandal 7 / Sukta 34 / Mantra 3

104 Sukta
25 Mantra
7/34/3
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- आर्चीगायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आप॑श्चिदस्मै॒ पिन्व॑न्त पृ॒थ्वीर्वृ॒त्रेषु॒ शूरा॒ मंस॑न्त उ॒ग्राः ॥३॥

आपः॑ । चि॒त् । अ॒स्मै॒ । पिन्व॑न्त । पृ॒थ्वीः । वृ॒त्रेषु॑ । शूराः॑ । मंस॑न्ते । उ॒ग्राः ॥

Mantra without Swara
आपश्चिदस्मै पिन्वन्त पृथ्वीर्वृत्रेषु शूरा मंसन्त उग्राः ॥

आपः। चित्। अस्मै। पिन्वन्त। पृथ्वीः। वृत्रेषु। शूराः। मंसन्ते। उग्राः ॥३॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 25 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
जो कन्या (पृथ्वीः) भूमि और (आपः) जल (चित्) ही के समान (अस्मै) इस विद्याव्यवहार के लिये (पिन्वन्त) सिंचन करती और (वृत्रेषु) धनों के निमित्त (उग्राः) तेजस्वी (शूराः) शूरवीरों के समान (मंसन्ते) मान करती हैं, वे विदुषी होती हैं ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है । जो कन्या जल के समान कोमलत्वादि गुणयुक्त हैं, पृथिवी के समान सहनशील और शूरों के समान उत्साहिनी विद्याओं को ग्रहण करती हैं, वे सौभाग्यवती होती हैं ॥३॥
Subject
फिर वे कैसी हों, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥